सीएलएसए की रिपोर्ट के अनुसार, रूस से रियायती दरों पर तेल आयात कर भारत को अपेक्षित लाभ नहीं मिल रहा है। जहां पहले 10–25 अरब डॉलर बचत का अनुमान था, असल में यह सालाना केवल 2.5 अरब डॉलर है। शिपिंग और बीमा जैसी अतिरिक्त लागतों के चलते वास्तविक छूट काफी सीमित है।