ऑफिस या किसी भी काम की जगह पर कई बार कर्मचारियों को तरह-तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। कभी माहौल सुरक्षित नहीं होता तो कभी उन्हें सम्मान नहीं मिलता है। कई बार स्थिति इतनी बिगड़ जाती है कि मामला मानसिक, शारीरिक या यौन उत्पीड़न (हैरेसमेंट) तक पहुंच जाता है। ऐसे हालात में कई कर्मचारी अपने हक की आवाज भी नहीं उठा पाते हैं। जबकि कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए भारत सरकार ने POSH एक्ट, 2013 बनाया है। इस कानून के तहत हर कंपनी में इंटरनल कंप्लेंट कमेटी (ICC) बनाना जरूरी है, जहां कर्मचारी खुलकर अपनी शिकायत दर्ज कर सकें। अगर कोई कंपनी इन नियमों का पालन नहीं करती या शिकायतों को नजरअंदाज करती है, तो उस पर जुर्माना लग सकता है और कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है। तो चलिए, जानें अपने अधिकार कॉलम में बात करेंगे कि वर्कप्लेस पर हैरेसमेंट क्या होता है? साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट: सवाल- हर कर्मचारी के कानूनी अधिकार क्या हैं? जवाब- भारत में हर कर्मचारी को कुछ जरूरी अधिकार दिए गए हैं, ताकि वह बिना डर, भेदभाव या शोषण के काम कर सके। ये अधिकार सुनिश्चित करते हैं कि कर्मचारी को समय पर वेतन मिले, तय घंटे तक ही काम कराया जाए, समय पर तय छुट्टियां मिलें और ऑफिस का माहौल सुरक्षित और सम्मानजनक हो। इन अधिकारों का मकसद सिर्फ कर्मचारी की सुरक्षा करना ही नहीं, बल्कि एक बेहतर और जिम्मेदार कार्यस्थल बनाना भी है। सवाल- वर्कप्लेस हैरेसमेंट क्या होता है? जवाब- ऑफिस या काम की जगह पर किसी भी कर्मचारी के साथ ऐसा व्यवहार करना जो उसे असहज, अपमानित या डरा हुआ महसूस कराए, वह वर्कप्लेस हैरेसमेंट है। यह एक तरह से नहीं, बल्कि तरह से हो सकता है। इसे नीचे दिए ग्राफिक में समझिए- सवाल- अगर कोई कर्मचारी वर्कप्लेस हैरेसमेंट का शिकार हो जाए तो उसके पास क्या विकल्प हैं? जवाब- ऐसे मामले में कर्मचारी चुप न रहे। सबसे पहले वह अपने ऑफिस की इंटरनल कंप्लेंट कमेटी (ICC) में लिखित शिकायत दर्ज कर सकता है। POSH एक्ट, 2013 के तहत हर कंपनी में यह कमेटी बनाना जरूरी है, ताकि पीड़ित कर्मचारी को न्याय मिल सके। अगर कंपनी ICC नहीं बनाती या शिकायत को अनदेखा करती है तो कर्मचारी सीधे लोकल कमेटी (जिला स्तर पर बनी समिति) या फिर लेबर डिपार्टमेंट और कोर्ट तक जा सकता है। सवाल- अगर कोई कंपनी हैरेसमेंट की शिकायत को नजरअंदाज करे तो क्या कार्रवाई होती है? जवाब- अधिवक्ता सरोज कुमार सिंह बताते हैं कि अगर कोई कंपनी कर्मचारी की यौन या मानसिक उत्पीड़न की शिकायत को गंभीरता से नहीं लेती है तो उस पर POSH एक्ट, 2013 के तहत सख्त कार्रवाई हो सकती है। सवाल- कर्मचारी अगर कंपनी में न्याय न पाए तो वो किस सरकारी या कानूनी संस्था से मदद ले सकता है? जवाब- अगर कर्मचारी को कंपनी के अंदर समाधान न मिले तो वह इन संस्थाओं से मदद ले सकता है। सवाल- क्या कॉन्ट्रैक्ट वर्कर, इंटर्न और फ्रीलांसर भी इस कानून के तहत सुरक्षित हैं? जवाब- POSH एक्ट के तहत महिलाएं चाहे स्थायी कर्मचारी हों, कॉन्ट्रैक्ट पर हों, इंटर्न या फ्रीलांसर सभी को कार्यस्थल पर सुरक्षा का अधिकार है। यह कानून सिर्फ पेड कर्मचारियों तक सीमित नहीं है, बल्कि किसी भी महिला को सुरक्षा प्रदान करता है, जो ऑफिस या उससे जुड़े किसी भी स्थान पर काम कर रही हो। सवाल- वर्कप्लेस पर हैरेसमेंट की शिकायत कैसे कर सकते हैं? जवाब- सबसे पहले ऑफिस की ICC में लिखित शिकायत दें। शिकायत में तारीख, समय, जगह और घटना की डिटेल देना जरूरी होता है। अगर ऑफिस में ICC नहीं है तो जिला स्तर की समिति में शिकायत की जा सकती है। सवाल- जो कंपनी कानून तोड़े, उस पर क्या कार्रवाई हो सकती है? जवाब- अगर कोई कंपनी श्रम कानूनों या POSH एक्ट जैसे नियमों का पालन नहीं करती तो उस पर वित्तीय जुर्माना लगाया जा सकता है। उसका लाइसेंस या रजिस्ट्रेशन रद्द किया जा सकता है। गंभीर मामलों में कंपनी के जिम्मेदार अफसरों पर फौजदारी मुकदमा भी चल सकता है। पीड़ित को मुआवजा (compensation) दिलाया जा सकता है। सवाल- अगर आप ऑफिस में किसी का हैरेसमेंट होते देखें तो क्या कर सकते हैं? जवाब- ऐसे मामले में सबसे पहले इस बारे में अपने सीनियर या एचआर (HR) को बताएं। आप चाहें तो उस व्यक्ति को भी सीधे कह सकते हैं कि उसका व्यवहार गलत है, मजाकिया नहीं है और उसे तुरंत रुकना चाहिए। कभी भी ऐसे बुरे बर्ताव पर हंसें नहीं या उसमें शामिल न हों क्योंकि इससे हैरेसर को बढ़ावा मिलेगा। आप इस बारे में अपने माता-पिता, किसी समझदार बड़े व्यक्ति या किसी सरकारी संस्था जैसे EEOC (Equal Employment Opportunity Commission) से भी बात कर सकते हैं। …………………….. ये खबर भी पढ़ें…जानें अपने अधिकार- डिजिटल प्राइवेसी का अधिकार:बिना इजाजत डेटा यूज करना गैरकानूनी, ऑनलाइन डेटा को सेफ रखने के 6 टिप्स आज डिजिटल टेक्नोलॉजी के दौर में हर इंसान की गतिविधियां कहीं-न-कहीं डेटा में बदल रही हैं। कौन कहां गया, क्या सर्च किया, किससे बात की, क्या खरीदा ये सारी जानकारियां स्मार्टफोन, एप्स और इंटरनेट प्लेटफॉर्म्स के जरिए रिकॉर्ड हो रही हैं। अक्सर व्यक्ति को इसकी भनक तक नहीं लगती है। पूरी खबर पढ़िए...