यह केंद्र सरकार की एक महत्वाकांक्षी पहल है जिसका उद्देश्य 18 अलग-अलग पारंपरिक व्यवसायों (जैसे सुनार, लोहार, कुम्हार, नाई, सुतार आदि) से जुड़े शिल्पकारों को आधुनिक तकनीक, बेहतर प्रशिक्षण और सस्ता ऋण प्रदान कर आत्मनिर्भर बनाना है।