एएसआई द्वारा किए गए सर्वे में भोजशाला के मंदिर होने के कई प्रमाण मिले हैं। रिपोर्ट में निष्कर्ष निकाला गया है कि कमाल मौलाना दरगाह के निर्माण में पहले से मौजूद मंदिर के हिस्सों का उपयोग किया गया था।