भोपाल का एम्स अब भारतीयों की शारीरिक बनावट, खान-पान और स्थानीय जरूरतों को ध्यान में रखते हुए दवाओं के नए मानक तैयार करेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि भारतीयों की प्रतिरोधक क्षमता यूरोपीय-अमेरीकी देशों के लोगों से अलग होती है।