मोहन भागवत ने कहा कि संघ की किसी से प्रतिस्पर्धा नहीं है। राष्ट्र सशक्त होगा, तो राष्ट्रवासी भी सशक्त होंगे। साथ ही उन्होंने का कि लंबी ऐतिहासिक यात्रा के बाद आज दुनिया भारत को फिर से नेतृत्वकारी भूमिका में देखने की आशा कर रही है।