धोती-कुर्ता पहन 42 किमी दौड़ा सोनीपत का 'सिक्स पैक ताऊ':मैराथन में बनाया रिकॉर्ड; 31 देशों के 30 हजार रनर्स के बीच जीता मेडल

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सोनीपत का 'सिक्स पैक' वाले ताऊ संजय उर्फ काला पहलवान ने दिल्ली में आयोजित 42 किलोमीटर की मैराथन तय समय से पहले पूरी कर अपना पहला मेडल जीत लिया। हरियाणवी धोती-कुर्ता पहनकर दौड़े सोनीपत के इस ‘सिक्स पैक ताऊ’ ने 31 देशों और 490 शहरों से आए 30 हजार से अधिक धावकों के बीच अपनी अलग पहचान बनाई। राजधानी में मिली इस उपलब्धि के बाद सोनीपत पहुंचने पर युवाओं ने उनका जोरदार स्वागत किया और उनकी फिटनेस व जज्बे की सराहना की। वैश्विक मंच पर दिखाया देसी दम दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में आयोजित कॉग्निजेंट दिल्ली हाफ मैराथन के 11वें संस्करण में 31 देशों और 490 शहरों से 30 हजार से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। देश के 32 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से धावक इसमें शामिल हुए। 2, 5, 10, 20 और 42 किलोमीटर की श्रेणियों में आयोजित प्रतियोगिता में 42 किलोमीटर की दौड़ सबसे चुनौतीपूर्ण रही। यह आयोजन एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया, एसोसिएशन ऑफ इंटरनेशनल मैराथन्स एंड डिस्टेंस रेसिज और वर्ल्ड एथलेटिक्स से मान्यता प्राप्त है। रेस के अंतिम चरण में बढ़ाई रफ्तार दौड़ के दौरान संजय उर्फ काला पहलवान ने अंतिम चरण में अपनी गति तेज की और फिनिश लाइन से करीब तीन किलोमीटर पहले एक विदेशी अंग्रेज धावक को पीछे छोड़ते हुए आगे निकल गए। पारंपरिक पहनावे में दौड़ते हुए उन्होंने दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। अखाड़े से मैराथन तक का सफर कभी सक्रिय पहलवान रहे संजय को परिस्थितियों के कारण अखाड़ा छोड़ना पड़ा था। उन्होंने अपने बेटे को पहलवानी में आगे बढ़ाया और खुद भी रोजाना कड़ी ट्रेनिंग जारी रखी। नियमित व्यायाम और संतुलित आहार की बदौलत उन्होंने लंबी दूरी की दौड़ में भी दमखम दिखाया। रेस पूरी करने के तुरंत बाद उन्होंने एक युवक के साथ 20 सपाटे लगाकर अपनी फिटनेस का प्रदर्शन भी किया। अब 100 किलोमीटर की तैयारी यह मैराथन उनके जीवन का पहला मेडल लेकर आई है। संजय उर्फ काला पहलवान का अगला लक्ष्य 100 किलोमीटर की अल्ट्रा मैराथन में हिस्सा लेना है। उनका कहना है कि निरंतर अभ्यास और अनुशासन से हर लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। यहां जानिए सिक्स पैक वाले ताऊ की पूरी कहानी…. बचपन में एक साल पहलवानी की: संजय पहलवान बताते हैं कि बचपन में पहलवानी का शौक था। घरवालों से जिद करके अखाड़े में जाना शुरू किया। हमारे गुरू होते थे- रघुबीर सिंह रायपुरिया। घर के हालात ऐसे नहीं थे कि पहलवानों वाली डाइट मिले, लेकिन जुनून ऐसा था कि जो रुखी-सूखी मिलती थी, उसी में खुश रहे। फिर भी हालात की वजह से अखाड़ा छोड़ना पड़ गया। अखाड़ा छूटा लेकिन अभ्यास जारी रखा: उन्होंने बताया कि घर के हालात के कारण अखाड़ा जाना छूट गया, लेकिन वह अभ्यास करते रहे। पहलवान तो अक्सर दूध-देसी घी पीते-खाते हैं। हमारे हालात ऐसे थे कि देसी घी नहीं मिलता था। मैं तो सरसों का तेल ही पी लेता था, उसी से मेरी खुराक पूरी हो जाती थी। बेटे संग स्टेडियम में खुद भी प्रैक्टिस करने लगे: काला पहलवान ने बताया कि अब बेटा हिमांशु बड़ा हो गया, तो सोचा मैं पहलवान नहीं बन सकता, बेटे को तो बना ही सकता हूं। दसवीं के बाद उन्होंने बेटे की प्रेक्टिस शुरू करवाई। तीन साल पहले उसे सोनीपत की रायपुर एकेडमी में भेजना शुरू किया। शुरुआत में वे बेटे को मैदान में ले जाकर प्रैक्टिस करवाते थे। इसी दौरान उनके भीतर फिर से पहलवानी का जुनून जाग उठा और उन्होंने खुद भी दोबारा अभ्यास शुरू कर दिया। वीडियो वायरल होने पर मिली एड: उन्होंने कहा कि कुछ एथलीटों ने वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिए, जिससे लोग उन्हें जानने लगे। युवा बच्चों के कहने पर फिर उन्होंने खुद वीडियो बनाकर डालनी शुरू की। बस फिर क्या था, किसी ने उन्हें देसी पहलवान, किसी ने रनिंग ताऊ तो किसी ने हरियाणवी सलमान खान कहना शुरू कर दिया। कई लोग कमेंट में लिखते हैं कि यह सब फेक है, कोई इस उम्र में इतनी कसरत कैसे कर सकता है। उन लोगों से मैं हाथ जोड़कर कहता हूं कि आप आ जाएं स्टेडियम में और गिन लें कि मैं ग्राउंड के कितने चक्कर लगाता हूं और कितने सपाटे मारता हूं। अब काला पहलवान की दिनचर्या और डाइट जानिए…. रोज तड़के 3 बजे उठते हैं: वे बताते हैं कि वे रोज तड़के 3 बजे उठ जाते हैं। उठते ही सबसे पहले रात में भिगोए गए 20-25 मुनक्कों का रस पीते हैं। इसके बाद कुछ सैर करके फ्रेश हो जाते हैं। फिर अपनी सफेद पगड़ी, सफेद धोती और सफेद जूते पहनकर गाड़ी से स्टेडियम पहुंच जाते हैं। 20 से 25 किलोमीटर दौड़ और फिर सपाटे: स्टेडियम में जाकर 20 से 25 किलोमीटर की दौड़ लगाते हैं। ये एक तरह से उनके लिए वार्मअप करने जैसा ही है। इस दौरान वे युवाओं के साथ फर्राटा दौड़ भी लगाते हैं। उनकी ऐसी कई वीडियो वायरल हैं, जिनमें महिला एथलीट तालियां व सीटियां बजाकर उनका हौसला बढ़ा रही हैं। वे चिल्लाकर कह रही हैं- ओ गया ताऊ! ट्रैक पर निकालते हैं मौसमी का जूस: रेस लगाने के तुरंत बाद वह ट्रैक पर ही हाथ से चलने वाले जूसर में मौसमी का जूस निकालकर पीते हैं। वे कहते हैं कि ये जूस उनके लिए सबसे जरूरी खुराक है। इससे वे खुद को ताजादम महसूस करते हैं। वे युवाओं को भी सही सलाह देते हैं कि दूध से भी ज्यादा जरूरी जूस है। रोज 700-800 सपाटे लगाते हैं काला पहलवान रोज स्टेडियम के ट्रैक पर ही ईंटें रखकर 700-800 सपाटे मारते हैं। अक्सर युवा एथलीट उन्हें देखकर हैरान हो जाते हैं और कई बार उनके सपाटे गिनते भी हैं। युवा एथलीट उनसे अपना कुर्ता उतारकर मसल्स दिखाने का आग्रह भी करते हैं। वे दावा करते हैं कि यदि रनिंग छोड़ दें, तो 2000 सपाटे तक लगा सकते हैं, और पहले भी कई बार 800 सपाटे रनिंग के बाद लगा चुके हैं। बीम एक्सरसाइज और स्ट्रेचिंग के साथ उनकी रोजाना 4 घंटे की कड़ी प्रेक्टिस होती है। रोज बादाम रगड़ कर पीते हैं उन्होंने बताया कि एक्सरसाइज के बाद रोज घर पर भिगोए गए 65-70 बादाम को कुंडी में रगड़ा लगाते हैं, फिर उसका जूस पीते हैं। दूध मिल गया तो पी लेते हैं, वैसे जरूरी नहीं। इसके अलावा खाने में रोटी-दाल-सब्जी या चटनी जो मिल जाए वो खा लेते हैं और कोई विशेष डाइट नहीं लेते। आजकल के युवा जो प्रोटीन शेक जैसे सप्लीमेंट लेते हैं, उनकी कोई जरूरत नहीं। बीमारी के सवाल पर वह हंसते हैं और कहते हैं कि भगवान की दया से कभी ऐसी नौबत नहीं आई। उन्होंने तो अपना ब्लड ग्रुप तक नहीं पता, कभी जरूरत ही नहीं पड़ी।