मणिपुर की छोटी सी फिल्म ने 'बाफ्टा' में रचा इतिहास, अवॉर्ड किया अपने नाम, खास है 'बूंग'

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दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित अवॉर्ड्स में गिने जाने वाले बाफ्टा अवॉर्ड्स में इस बार भारतीय मणिपुरी भाषा की कॉमेडी-ड्रामा फीचर फिल्म ‘बूंग’ को सर्वश्रेष्ठ बाल एवं पारिवारिक फिल्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया है. ये पल सिर्फ फिल्म की टीम के लिए ही नहीं बल्कि पूरे देश के लिए बेहद खास रहा है. एक क्षेत्रीय भाषा की फिल्म का इतने बड़े इंटरनेशनल मंच पर पहचान बनाना सच में गर्व की बात है.एक्सेल एंटरटेनमेंट और लक्ष्मीप्रिया देवी की मेहनतफिल्म ‘बूंग’ फरहान अख्तर की एक्सेल एंटरटेनमेंट के बैनर तले बनी है और इसे डायरेक्ट लक्ष्मीप्रिया देवी ने किया है. इस साल की ये पहली भारतीय फिल्म थी जिसे बाफ्टा में नॉमिनेट किया गया था और अब इसे सर्वश्रेष्ठ बाल एवं पारिवारिक फिल्म का अवॉर्ड भी मिल गया है. इससे साफ है कि फिल्म की कहानी और प्रस्तुति ने इंटरनेशनल जूरी पर गहरा असर डाला है.अवॉर्ड लेते वक्त भावुक हुईं डायरेक्टरजब लक्ष्मीप्रिया देवी मंच पर अवॉर्ड लेने पहुंचीं तो उनके साथ फरहान अख्तर भी नजर आए थे. ये पल उनके लिए काफी इमोशनल था. उन्होंने मंच से बाफ्टा का धन्यवाद किया और अपनी छोटी सी फिल्म को इतना बड़ा सम्मान और प्यार देने के लिए दिल से शुक्रिया कहा. उन्होंने कहा, 'यहां तक चलना ऐसा लग रहा था मानो किसी पहाड़ की चोटी पर पहुंचने के आखिरी कुछ कदम बचे हों जिस पर चढ़ने के बारे में हमें कभी पता ही नहीं था.'Heartiest congratulations to the team of Boong on winning the BAFTA Award for Best Children’s and Family Film at the BAFTA Awards 2026.A Manipuri-language film earning a distinguished international recognition reflects the immense talent, creativity, and resilience of our… pic.twitter.com/1YQ9xJ1Nqv— N. Biren Singh (@NBirenSingh) February 23, 2026मणिपुर को समर्पित रही जीतअपनी स्पीच में उन्होंने कहा, 'ये फिल्म और ये जीत मेरे गृह राज्य मणिपुर को एक ट्रिब्यूट है. जिसे भारत में 'नजरअंदाज और प्रतिनिधित्वहीन' माना जाता है. ये फिल्म भारत के एक बेहद परेशान, उपेक्षित और कम प्रतिनिधित्व वाले क्षेत्र मेरे गृह नगर मणिपुर की पृष्ठभूमि पर आधारित है. मैं इस मौके पर मणिपुर में शांति की वापसी के लिए प्रार्थना करना चाहती हूं.' उनके इन शब्दों ने वहां मौजूद लोगों को भी भावुक कर दिया था.फिल्म की कहानी और फेस्टिवल सफरफीचर फिल्म ‘बूंग’ मणिपुर सीमा पर नस्लीय तनाव और जीवन की परेशानियों से जूझ रहे एक स्कूल के बच्चे की कहानी है जिसने जन्म से हिंसा और उपेक्षा को महसूस किया है. फिल्म राज्य में व्याप्त सामाजिक और राजनीतिक तनाव को भी बारीकी से दिखाती है. कहानी में स्कूली बच्चा अपने बिखरे परिवार को एक करने और अपने बिछड़े पिता को वापस लाने की लड़ाई लड़ रहा है. बाफ्टा से पहले ‘बूंग’ का 2024 में टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल के डिस्कवरी सेक्शन में प्रीमियर हुआ था. इसके अलावा फिल्म वारसॉ इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल 2024 के 55वें इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ इंडिया और इंडियन फिल्म फेस्टिवल ऑफ मेलबर्न 2025 में भी प्रदर्शित की जा चुकी है.