प्रीवियस इयर और असेसमेंट इयर जैसे भ्रम पैदा करने वाले वर्गीकरण के स्थान पर सिर्फ टैक्स ईयर होगा। इससे टैक्स कैलकुलेशन करना और समझना दोनों आसान हो जाएगा।