Mangal Shukra: मिडिल ईस्ट में चल रहा युद्ध व तनाव अब दुनियाभर के लिए संकट बन चुका है. युद्ध के दौरान तेल-गैस की आपूर्ति की समस्या गहराने लगी है. इस बीच ग्रहों की स्थिति भी कुछ ऐसी बन रही है, जिसने वैश्विक स्तर पर चिंता की घंटी बजा दी है.26 मार्च 2026 को शुक्र ग्रह का गोचर मेष राशि में होगा, जो मंगल की राशि है और यहां पहले से ही मंगल ग्रह मौजूद है. ज्योतिष में शुक्र और मंगल की युति को ऊर्जा, टकराव और संसाधनों को लेकर प्रतिस्पर्धा का संकेत माना जाता है. जानकारों की मानें तो, मंगल और शुक्र ग्रह की युति और मौजूद स्थिति युद्ध, आर्थिक संकट को और गंभीर बना सकता है. इसलिए इसे हमें चेतावनी के रूप में देखना चाहिए, क्योंकि शुक्र और मंगल की स्थिति वर्तमान में एक भयावह तस्वीर को पेश करती है, जिसका सीधा संबंध युद्ध और ऊर्जा संसाधनों से जुड़ा है.मिडिल ईस्ट युद्ध पर मंगल का विनाशकारी प्रभाव ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, मेष राशि अग्नि तत्व की राशि है और इसका स्वामी मंगल ग्रह है, जो युद्ध, सैन्य शक्ति, अक्रामकता और संघर्ष का कारक है. मौजूदा समय में मंगल मेष राशि में उपस्थित है, जिससे मंगल का प्रभाव मजबूत हो गया है, जो वर्तमान में विनाशकारी घटना और हिंसा का कारण बन सकता है. मंगल जब प्रभावी होता है तो सीमाओं पर तनाव, सैन्य गतिविधियों में तेजी और राजनीतिक बयानबाजी बढ़ने के संकेत मिलते हैं.तेल-गैस पर शुक्र की नजरवहीं दूसरी ओर अगर बात करें शुक्र ग्रह की तो, ज्योतिष के अनुसार, संसाधन, विलासिता, ऊर्जा का कारक शुक्र ग्रह है. शुक्र जब मंगल के साथ युति बनाता है या मंगल की राशि में गोचर करता है तो यह संकेत है कि, इन वस्तुओं की आपूर्ति या कीमतों में अस्थिरता आ सकती है.मंगल-शुक्र की युति से गहराएगा संकट!मंगल फिलहाल अपनी स्वराशि मेष में विराजमान हैं और 2 अप्रैल 2026 को मीन राशि में गोचर करेगा. वहीं शुक्र का गोचर 26 मार्च 2026 को मेष राशि में होगा, जिससे मंगल और शुक्र की युति बनेगी. मंगल और शुक्र का संयोजन ऐसे समय में बनना जब दुनियाभर में पहले से ही युद्ध से ऊर्जा संकट गहराया हुआ है, यह बढ़ते संघर्ष और संसाधनों के संकट की चेतावनी देता है. इस तरह से शुक्र और मंगल ग्रह की स्थिति इस समय दोहरी मार की तरह है. युद्ध और ऊर्जा आपूर्ति का असर जाहिर तौर पर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है.आर्थिक और वैश्विक प्रभावज्योतिष के अनुसार शुक्र धन, बाजार और व्यापार से भी जुड़ा ग्रह माना जाता है. मंगल के साथ इसकी युति कई बार अचानक उतार-चढ़ाव का संकेत देती है. ऐसे में ऊर्जा बाजार, शेयर मार्केट और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में हलचल भी देखी जा सकती है. ये भी पढ़ें: Eid 2026: इस्लाम में कितनी ईद होती हैं? जानें ईद-उल-फितर से ईद-उल-अजहा तक का महत्वDisclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.