जांच में पाया गया कि इन खातों का उपयोग देश के विभिन्न स्थानों से साइबर ठगी की राशि को प्राप्त करने हेतु किया जा रहा था, जिसमें कुल लगभग 86 लाख 33 हजार 247 रुपये का अवैध लेन-देन पाया गया।