सरकार के इस आदेश से पाइपलाइन से जुड़ी परियोजनाओं की मंजूरी में होने वाली देरी कम होगी, प्रक्रियाएं आसान होंगी और निवेशकों के लिए ज्यादा स्पष्ट और पूर्वानुमेय नियम उपलब्ध होंगे।