वर्ष 2008 में राज्य सरकार ने याचिकाकर्ताओं की सेवाएं नियमित कर दी थी। रिटायरमेंट के बाद राज्य सरकार ने नियमितिकरण अवधि की गणना करने के बाद पेंशन का निर्धारण किया। राज्य सरकार के इस निर्णय को चुनौती देते हुए कर्मचारियों ने याचिका दायर की थी।