तेल का मुद्दा ही वह मुख्य आधार था जिसके ज़रिए मोसद्देग़ सत्ता में आए. एंग्लो-ईरानी ऑयल कंपनी, जो बाद में ब्रिटिश पेट्रोलियम बन गई, बीसवीं शताब्दी की शुरुआत से ही ईरानी तेल पर नियंत्रण रखती थी.