Obesity Health Risk: भारत में मोटापा अब सिर्फ लाइफस्टाइल से जुड़ी समस्या नहीं रह गया है, बल्कि यह एक गंभीर स्वास्थ्य खतरे के रूप में तेजी से उभरा है. डायबिटीज, दिल की बीमारी और हाई ब्लड प्रेशर जैसी कई समस्याओं से इसका सीधा संबंध है. इसके बावजूद जहां ब्लड प्रेशर की जांच हर क्लिनिक विजिट में आम है, वहीं मोटापा अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है. यही अनदेखी अब चिंता की बड़ी वजह बन रही है.देश में मोटापे के बढ़ते मामलों की तस्वीर भी चिंताजनक है. नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के अनुसार, लगभग हर चौथा वयस्क ओवरवेट या मोटापे का शिकार है. कुछ राज्यों में यह आंकड़ा 50 प्रतिशत तक पहुंच चुका है. खास बात यह है कि यह समस्या सिर्फ शहरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि ग्रामीण इलाकों में भी तेजी से फैल रही है. आंकड़े बताते हैं कि गांव में भी बड़ी संख्या में महिलाएं और पुरुष इस समस्या से जूझ रहे हैं. ऐसे में चलिए अब आपको बताते हैं कि ब्लड प्रेशर की तरह मोटापा बार-बार क्यों चेक नहीं किया जाता है.अब लाइफस्टाइल इश्यू नहीं रहा मोटापाएक समय था, जब मोटापे को आरामदायक लाइफस्टाइल का असर माना जाता था. लेकिन अब यह कई गंभीर बीमारियों की जड़ बन चुका है. खासकर पेट के आसपास जमा चर्बी सबसे ज्यादा खतरनाक मानी जाती है, जो डायबिटीज, दिल की बीमारी, हाई कोलेस्ट्रॉल और हाई ब्लड प्रेशर का खतरा बढ़ाती है. वैश्विक स्तर पर भी हालत तेजी से बिगड़ रहे हैं. बीते 15 वर्षों में मोटापे के मामलों में दोगुनी और पिछले 30 सालों में तीन गुना तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है. यह संकेत साफ है कि समस्या अब तेजी से फैल रही है.आधुनिक लाइफस्टाइल से कैसे बढ़ा रहा खतरा?बदलती लाइफस्टाइल ने खाने-पीने और रोजमर्रा की आदतों को पूरी तरह बदल दिया है. आजकल का खाना जल्दी मिलने वाला, सस्ता और अक्सर ज्यादा फैट, नमक और शुगर से भरा होता है. वहीं विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार दुनिया की बड़ी आबादी पर्याप्त फिजिकल एक्टिविटी नहीं कर पा रही है. भारत में एक और चुनौती यह है कि बड़ी संख्या में लोग संतुलित और हेल्दी डाइट अफोर्ड नहीं कर सकते. इसका असर बच्चों पर भी साफ दिख रहा है, जहां कम फिजिकल एक्टिविटी और हाई कैलोरी फूड की वजह से मोटापा तेजी से बढ़ रहा है. 2017 में हुई ग्लोबल बर्डन आफ डिजीज स्टडी के अनुमान के अनुसार भारत में 144 लाख से ज्यादा बच्चे मोटापे का शिकार है. ब्लड प्रेशर की तरह क्यों जरूरी है नियमित जांच?ब्लड प्रेशर की नियमित जांच इसलिए आम हो गई है, क्योंकि यह आसान है और समय रहते खतरे का पता चल जाता है. मोटापे के मामले में भी यही सिद्धांत लागू होता है. बॉडी मास इंडेक्स और कमर का मैप जैसे साधारण तरीके शुरुआती खतरे को पहचान सकते हैं. लेकिन इन्हें अभी भी क्लीनिक में नियमित जांच का हिस्सा नहीं बनाया गया. समय रहते पहचान होने से छोटे-छोटे बदलाव के जरिए बड़ी बीमारियों को रोका जा सकता है. साथ ही अब जब मोटापे को एक मेडिकल स्थिति की तरह देखा जाएगा तो इससे जुड़ा सामाजिक कलंक भी कम होगा. ये भी पढ़ें-Pneumonia Symptoms: क्या एक फेफड़े से भी जिंदा रह सकता है इंसान, जानें भयंकर निमोनिया में कैसे बचाई जाती है जान?इलाज अब सिर्फ डाइटिंग तक सीमित नहींमोटापे को कंट्रोल करने के लिए संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और अच्छी नींद आज भी सबसे जरूरी उपाय है. लेकिन गंभीर मामलों में यह पर्याप्त नहीं होता. मेडिकल साइंस में भी काफी प्रगति हुई है, अब सर्जिकल ऑप्शंस जैसे स्लीव गेस्ट्रोक्टॉमी और गैस्ट्रिक बाईपास ज्यादा सुरक्षित और प्रभावी माने जाते हैं. यह केवल वजन कम करने के लिए नहीं, बल्कि शरीर के मेटाबॉलिज्म और भूख को कंट्रोल करने में भी मदद करते हैं.ये भी पढ़ें-Summer Health Tips: क्या गर्मियों में आपको भी कम लगती है भूख, जानें ऐसा होना कब सही और कब खतरनाक?Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.