आपका पैसा- क्या आप ज्यादा टैक्स दे रहे हैं:सही टैक्स रिजिम कैसे चुनें, न करें ये 7 गलतियां, जानें टैक्स बचाने के आसान तरीके

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क्या आपको भी लगता है कि आप ज्यादा टैक्स दे रहे हैं? ITR (इनकम टैक्स रिटर्न) फाइल करते समय ज्यादातर लोगों के मन में ये सवाल आता है। इसकी वजह है सही और पर्याप्त जानकारी न होना। कुछ लोग सही टैक्स रिजिम नहीं चुनते, तो कुछ उपलब्ध छूट और डिडक्शन का पूरा फायदा नहीं उठा पाते। इसलिए वे अनजाने में ज्यादा टैक्स भरते रहते हैं। सही जानकारी और थोड़ी सी प्लानिंग से काफी हद तक टैक्स बचाया जा सकता है। इसलिए आज 'आपका पैसा' कॉलम में हम ‘टैक्स प्लानिंग’ की बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- सवाल- ये कैसे जानें कि हम जरूरत से ज्यादा टैक्स तो नहीं भर रहे हैं? जवाब- इसके लिए आपको अपने टैक्स कैलकुलेशन और प्लानिंग को थोड़ा ध्यान से समझना होगा। सबसे पहले अपनी इनकम और टैक्स स्लैब समझें। सभी डिडक्शन और एक्सेप्शंस चेक करें। इसके लिए करें ये काम- अगर आपने सभी डिडक्शन क्लेम नहीं किए, सही रिजिम नहीं चुनी और सही इनकम रिपोर्ट नहीं की है तो इसका मतलब है कि आप जरूरत से ज्यादा टैक्स भर रहे हैं। सवाल- किन गलतियों के कारण हमारी टैक्स लायबिलिटी बढ़ जाती है? जवाब- टैक्स ज्यादा लगने की सबसे बड़ी वजह गलत प्लानिंग या लापरवाही होती है। लोग अक्सर ये गलतियां करते हैं- सवाल- अगर टैक्स बचाना है तो इसके क्या बेसिक्स समझना जरूरी है? जवाब- अगर टैक्स बेसिक्स क्लियर हैं तो आप आसानी से टैक्स लायबिलिटी कम कर सकते हैं। चलिए इसके बेसिक्स समझते हैं- टैक्सेबल इनकम क्या है? डिडक्शन और एग्जेम्प्शन में क्या फर्क है? ओल्ड और न्यू टैक्स रिजिम में क्या फर्क है? टैक्स स्लैब कैसे काम करते हैं? क्या टाइम पर प्लानिंग जरूरी है? सवाल- कैसे समझें कि आपके लिए न्यू रिजिम बेहतर है या ओल्ड? जवाब- अगर आप निवेश और टैक्स सेविंग करते हैं तो ओल्ड रिजिम बेहतर है। अगर नहीं करते तो न्यू रिजिम चुनना बेहतर है। इनकम के हिसाब से रिजिम चुनना मुश्किल काम है, लेकिन हम इसे थोड़ा और आसान करके बता रहे हैं। सवाल- टैक्स भरने में लोग क्या कॉमन गलतियां करते हैं? जवाब- टैक्स फाइल करते समय छोटी-छोटी गलतियां भी ज्यादा टैक्स या पेनल्टी तक पहुंचा सकती हैं। आमतौर पर लोग ये गलतियां करते हैं- सवाल- किन टैक्स सेविंग स्कीम्स में इन्वेस्ट कर सकते हैं? जवाब- टैक्स बचाने के लिए कई ऐसी स्कीम्स हैं, जहां निवेश करने पर डिडक्शन भी मिलता है और ब्याज भी मिलता रहता है। आप अपने गोल और रिस्क के हिसाब से इन्हें चुन सकते हैं- सवाल- 80C के तहत क्या-क्या क्लेम किया जा सकता है? जवाब- सेक्शन 80C के तहत आप सालाना 1.5 लाख रुपए तक की इनकम पर टैक्स बचा सकते हैं। इसके लिए कई निवेश और खर्च शामिल होते हैं। सवाल- क्या हेल्थ इंश्योरेंस से भी टैक्स बचा सकते हैं? जवाब- हां, हेल्थ इंश्योरेंस लेकर आप टैक्स बचा सकते हैं और मेडिकल खर्च से सुरक्षा भी पा सकते हैं। सवाल- HRA और रेंट से टैक्स कैसे बचाया जा सकता है? जवाब- अगर आप किराए के घर में रहते हैं और आपकी सैलरी में HRA (हाउस रेंट अलाउंस) मिलता है, तो वह पूरा हिस्सा टैक्सेबल नहीं होता। यानी आप इस पर टैक्स बचा सकते हैं। कैसे तय होती है HRA टैक्स छूट? HRA पर मिलने वाली छूट नीचे दिए 3 पॉइंट्स में से जो सबसे कम हो, उतनी छूट मिलती है- आपको कंपनी से मिला कुल HRA आपकी बेसिक सैलरी का- सवाल- क्या NPS और होम लोन से ज्यादा टैक्स बेनिफिट मिलता है? जवाब- हां, NPS और होम लोन ऐसे ऑप्शन हैं, जिनसे आप 80C के अलावा भी अतिरिक्त टैक्स छूट ले सकते हैं। पहले 80C समझें- अब NPS समझें- कुल फायदा 1.5 लाख (80C) + 50,000 (NPS) = 2 लाख रुपए तक टैक्स छूट मिल सकती है। होम लोन कैसे टैक्स बचाता है? होम लोन में दो जगह फायदा मिलता है- ………………ये खबर भी पढ़िएआपका पैसा- होम लोन और होम लोन इंश्योरेंस में फर्क: क्या इंश्योरेंस लेना जरूरी है, फाइनेंशियल एक्सपर्ट से जानें इसके फायदे-नुकसान हर किसी का सपना होता है कि उसका अपना एक सुंदर घर हो। कई लोग इस सपने को पूरा करने के लिए होम लोन लेते हैं। लोन की मंजूरी मिलते ही लगता है कि सबसे बड़ी मुश्किल पार हो गई है। लेकिन असली जिम्मेदारी यहीं से शुरू होती है। लोग होम लोन तो ले लेते हैं, लेकिन उसे सिक्योर करना भूल जाते हैं। आगे पढ़िए…