मौजूदा परिस्थितियों की वजह से नए टैंकर ईरानी तेल लोड करने में असमर्थ हैं और जमीन पर मौजूद ईरान की भंडारण सुविधाएं भी अपनी क्षमता की सीमा तक पहुंच चुकी हैं।