अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस वक्त दुनियाभर में लगाए गए टैरिफ को लेकर सुर्खियों में बने हुए हैं. वहीं इस दौरान डोनाल्ड ट्रंप की सेहत को लेकर भी चर्चा और चिंता हो रही है. इसी बीच अमेरिका को लेकर सवाल उठ रहा है कि क्या वहां पर तख्तापलट हो सकता है? दरअसल यह सवाल इसलिए उठ रहा है, क्योंकि अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने एक हैरान करने वाला बयान दे डाला है. जेडी वेंस का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब डोनाल्ड ट्रंप के हाथ पर एक बड़ा सा नीला निशान देखा गया. इसके बाद से ही उनकी सेहत को लेकर सवाल हो रहा है. ऐसे में यह जानना जरूरी है कि अगर अमेरिका में राष्ट्रपति को पद पर रहते हुए कुछ हो जाता है, तो आखिर अगला राष्ट्राध्यक्ष कौन बनता है? क्या भारत वाला नियम अमेरिका में भी लागू होता है, आइए जानें. क्या बोले थे जेडी वेंस?अमेरिका के उप राष्ट्रपति जेडी वेंस ने यूएसए टुडे को दिए एक इंटरव्यू के दौरान अपनी तैयारियों और डोनाल्ड ट्रंप की सेहत के बारे में खुलकर बात की है. उन्होंने कहा है कि डोनाल्ड ट्रंप के साथ कोई भी भयानक त्रासदी होने की स्थिति में वे राष्ट्रपति के रूप में कार्यभार संभालने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं. वहीं ट्रंप ने भी इस महीने की शुरुआत में वेंस को MAGA आंदोलन का अपना सबसे संभावित उत्तराधिकारी बताया था. चलिए जानें कि क्या अगर ट्रंप को कुछ हो जाता है तो क्या वेंस राष्ट्रपति बन सकते हैं? क्या अमेरिका में भी भारत की तरह से सिस्टम है?अमेरिका में क्या है नियम?अमेरिका में राष्ट्रपति ही देश का सबसे बड़ा कार्यकारी और संवैधानिक प्रमुख होता है. वहां नियम थोड़ा अलग है. अगर राष्ट्रपति का निधन हो जाए या वे काम करने में अक्षम हो जाएं, तो उपराष्ट्रपति तुरंत ही पूर्ण राष्ट्रपति बन जाते हैं. यानी वे सिर्फ अस्थायी तौर पर नहीं बल्कि पूरे कार्यकाल के लिए राष्ट्रपति का पद संभालते हैं.अगर उपराष्ट्रपति भी किसी वजह से उपलब्ध न हों तो वहां एक तय क्रम यानि कि Line of Succession है. इस क्रम में सबसे पहले हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स के स्पीकर, उसके बाद सीनेट के प्रेजिडेंट प्रो टेम्पोर, और फिर कैबिनेट के सदस्य आते हैं. कैबिनेट में भी शुरुआत विदेश मंत्री से होती है और फिर बाकी मंत्रालयों के प्रमुख आते हैं. इस तरह अमेरिका ने सुनिश्चित किया है कि राष्ट्रपति पद कभी खाली न रहे और सत्ता का हस्तांतरण तुरंत हो जाए.भारत में क्या होता है?भारत में राष्ट्रपति देश का सर्वोच्च संवैधानिक पद है. अगर कभी राष्ट्रपति का निधन हो जाए, इस्तीफा दे दें या किसी कारण से पद खाली हो जाए तो संविधान का अनुच्छेद 65 लागू होता है. इसके अनुसार, उपराष्ट्रपति तुरंत कार्यवाहक राष्ट्रपति बन जाते हैं और सारी जिम्मेदारी संभालते हैं. अगर उपराष्ट्रपति भी उपलब्ध न हों तो यह जिम्मेदारी सीधे सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को मिल जाती है. हालांकि यह स्थिति अस्थायी होती है क्योंकि नए राष्ट्रपति का चुनाव छह महीने के अंदर कराना जरूरी है.अब अगर प्रधानमंत्री की बात करें तो प्रधानमंत्री देश की कार्यपालिका के प्रमुख होते हैं. अगर प्रधानमंत्री का निधन हो जाए, तो उनका पद तुरंत खाली हो जाता है. ऐसे समय में राष्ट्रपति सरकार के कामकाज को चलाने के लिए कैबिनेट के किसी वरिष्ठ मंत्री को कार्यवाहक प्रधानमंत्री बना देते हैं. उसके बाद सत्ताधारी पार्टी या गठबंधन अपने सांसदों की बैठक बुलाकर नया नेता चुनती है. जिस नेता को बहुमत का समर्थन मिलता है, उसे राष्ट्रपति स्थायी प्रधानमंत्री नियुक्त कर देते हैं. यह भी पढ़ें: ये हिंदू शासक अपने दम में बने थे राजा, नेपोटिज्म में नहीं मिली थी गद्दी