NARI Index 2025: महिलाओं के लिए ये हैं भारत के सबसे असुरक्षित शहर, रात तो क्या दिन में भी लगता है डर!

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भारत में महिलाएं कितनी सुरक्षित हैं और कौन से शहर उन्‍हें सबसे सुरक्षित माहौल देते हैं, इस सवाल का जवाब अब नारी इंडेक्स 2025 ने सामने रख दिया है. रिपोर्ट के अनुसार, देश के कई शहर महिलाओं की सुरक्षा और बराबरी के मामले में मिसाल पेश कर रहे हैं, तो वहीं कुछ बड़े शहर अब भी सबसे असुरक्षित की लिस्ट में शामिल है. कोहिमा, विशाखापट्टनम और भुवनेश्वर टॉप पर राष्ट्रीय वार्षिक महिला रिपोर्ट एंव सूचकांक के अनुसार कोहिमा, विशाखापट्टनम, भुवनेश्वर, आइजोल, गंगटोक, ईटानगर और मुंबई भारत की सबसे सुरक्षित शहरों में ग‍िने गए हैं. रिपोर्ट के अनुसार इन शहरों को बेहतर स्कोर मिलने के पीछे लैंगिक समानता, मजबूत पुलिस व्यवस्था, महिलाओं के लिए अनुकूल इंफ्रास्ट्रक्चर और नागरिक भागीदारी जैसे कारक अहम रहे. असुरक्षा में सबसे नीचे रहे ये शहर वहीं दूसरी और पटना, जयपुर, फरीदाबाद, दिल्ली, कोलकाता, श्रीनगर और रांची महिलाओं की सुरक्षा के मामले में सबसे निचले पायदान पर रहे. ‌इन शहरों के खराब प्रदर्शन की वजह पितृसत्तात्मक सोच, कमजोर कानून व्यवस्था, जवाबदेही और बुनियादी ढांचे की कमी को बताया गया है. रिपोर्ट के अनुसार सर्वे में शामिल 10 में से 6 महिलाओं ने अपने शहर को सुरक्षित माना, लेकिन करीब 40% ने खुद को असुरक्षित या कम सुरक्षित बताया. खासतौर पर रात के समय सार्वजनिक परिवहन और मनोरंजन स्थलों पर महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सबसे ज्यादा चिंता सामने आई. शिक्षा और कार्य स्थल पर स्थिति शैक्षणिक संस्थानों में 86% महिलाएं दिन में सुरक्षित महसूस करती है, लेकिन रात के समय उनकी धारणा बदल जाती है. वहीं कार्यस्थल पर 91% महिलाएं सुरक्षित महसूस करती हैं. हालांकि, आधी महिलाओं को यह भी पता नहीं है कि वहां पोश यानी यौन उत्पीड़न की रोकथाम नीति लागू है या नहीं. जिन जगहों पर यह नीति मौजूद है वहां महिलाएं ज्यादा संतुष्ट दिखी. 2024 में 7% महिलाओं ने सार्वजनिक जगहों पर उत्पीड़न का सामना किया, जबकि 24 साल से कम उम्र की महिलाओं में यह आंकड़ा 14% तक पहुंच गया. सबसे ज्यादा 38% घटनाएं आस-पड़ोस और सार्वजनिक परिवहन में 29% दर्ज की गई. चौंकाने वाली बात यह है कि सिर्फ हर तीन में से एक पीड़िता ने ही शिकायत दर्ज कराई. एनसीआरबी आंकड़ों से अलग हकीकत रिपोर्ट में कहा गया है कि दो तिहाई महिलाएं उत्पीड़न की शिकायत ही नहीं करती, इसका मतलब है कि एनसीआरबी यानी राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो के पास महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े वास्तविक आंकड़े कभी पूरी तरह दर्ज नहीं होते. इस वजह से नारी जैसे परसेप्शनस आधारित सर्वे को जरूरी बताया गया है. ये भी पढ़ें- भारत में महिलाओं के लिए सबसे सुरक्षित है यह एयरपोर्ट, मिलती हैं इतनी सुविधाएं