जलवायु परिवर्तन के कारण छोटे द्वीप राष्ट्रों, जैसे तुवालु और मालदीव, के अस्तित्व पर संकट मंडरा रहा है। इन देशों ने अपनी पहचान बचाने के लिए डिजिटल समाधान, संधियों और इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट्स को अपनाया है। लेकिन अंतरराष्ट्रीय कानून में इस बात को लेकर कोई स्पष्ट जवाब नहीं है कि अगर द्वीप डूब जाएं तो क्या होगा।