बॉडीगार्ड्स के जरिए ईरानी लीडर्स तक पहुंचा था इजराइल:100 फीट गहरे बंकर में चल रही सीक्रेट मीटिंग हैक की, फिर 6 बम गिराए

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तारीख-16 जून 2025 जगह- ईरान ईरान और इजराइल के बीच जंग शुरू हुए चार दिन बीत चुके थे। इजराइल को मुंहतोड़ जवाब देने के लिए ईरान के सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल की एक गुप्त बैठक चल रही थी। यह बैठक पहाड़ के नीचे 100 फीट गहरे बंकर में हो रही थी। बैठक इतनी गोपनीय थी कि कुछ खास लोग जैसे राष्ट्रपति मसूद पजशकियान , खुफिया मंत्रालय के मुखिया और कुछ शीर्ष सैन्य कमांडर ही इस जगह और मीटिंग के समय से वाकिफ थे। लेकिन बैठक शुरू होने के कुछ ही देर बाद बंकर पर इजराइल ने हमला कर दिया। इजराइली सेना ने बंकर के दो दरवाजों को अपना निशाना बनाया और 6 बम गिराए। धमाके के बाद अंदर मौजूद लोगों के लिए सांस लेना भी मुश्किल हो गया। इस हमले में किसी बड़े लीडर की मौत नहीं हुई, लेकिन राष्ट्रपति मसूद इसमें घायल हो गए। साथ ही बाहर मौजूद सभी बॉडीगार्ड मारे गए थे। अमेरिकी मीडिया न्यूयॅार्क टाइम्स के मुताबिक ये हमला बॉडीगार्ड्स के फोन इस्तेमाल करने के कारण हुआ। उन्होंने न सिर्फ फोन का इस्तेमाल किया, बल्कि सोशल मीडिया पर पोस्ट भी किए। इजराइली खुफिया एजेंसी ने इन फोन को हैक कर लिया और पता लगा लिया कि ईरान के शीर्ष नेता कहां इकट्ठा हुए हैं। ईरान की एक छोटी सी गलती से उसके लीडर्स की जान खतरे में पड़ी। आखिर कैसे बचे ये लोग? स्टोरी में जानिए... इजराइल ने ईरान पर 200 फाइटर जेट से हमला किया ईरान-इजराइल के बीच 13 जून को जंग शुरू हुई थी, जब इजराइल ने सुबह-सुबह ईरान के 4 एटमी और 2 सैन्य ठिकानों पर 200 फाइटर जेट से हमला कर दिया। जिसमें ईरान के 14 वैज्ञानिक, 20 से ज्यादा मिलिट्री कमांडर मारे गए थे। हमले के बाद इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा था कि ईरान परमाणु बम तैयार करने वाला था, इसलिए उस पर हमला किया। इजराइली सेना का दावा था है कि ईरान के पास 15 परमाणु बम बनाने लायक यूरेनियम है। इजराइल ने इसीलिए टारगेट भी 4 बड़े न्यूक्लियर प्लांट्स को किया। वहीं हथियार बनाने की क्षमता रखने वाली एक फैक्ट्री और बड़े मिलिट्री अफसरों के रेसीडेंशियल कॉम्प्लेक्स को भी तबाह कर दिया। इसके बाद ईरान ने भी जवाबी हमला करते हुए इजराइल पर 150 से ज्यादा मिसाइलें दागीं। ईरान ने इसे 'ट्रू प्रॉमिस थ्री' नाम दिया। 16 जून को ईरान ने इजराइल पर बड़ा हमला किया 16 जून को ईरान ने इजराइल पर अपना सबसे बड़ा हमला किया। ईरानी सेना ने सेंट्रल इजराइल में कई जगहों पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। इसमें 8 लोगों की मौत हो गई, जबकि 200 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। इसी दिन इजराइली एयरफोर्स ने ईरानी की राजधानी तेहरान में नेशनल टीवी न्यूज चैनल इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ब्रॉडकास्टिंग (IRIB) की बिल्डिंग और पर बम गिराए। घटना के समय टीवी एंकर लाइव शो होस्ट कर रही थी। वह बम धमाके में बाल-बाल बच गई। घटना का वीडियो भी सामने आया, जिसमें एंकर को स्टूडियो से भागते हुए देखा गया। उसके पीछे की स्क्रीन काली हो गई। इजराइल ने ईरानी सुरक्षाकर्मी के फोन हैक किए इजराइल के बढ़े हमलों को रोकने के लिए ईरान के अधिकारियों ने एक गुप्त बैठक बुलाई, जिसमें कुछ चुनिंदा लोग ही शामिल होने वाले थे। इजराइल की खुफिया एजेंसी मोसाद इस बैठक के बारे में जानकारी जुटाने में लगा था। ताकि वो सभी लीडर का खात्मा एक साथ कर सके। मीटिंग में शामिल होने वाले सभी लोग अलग-अलग कारों में, बिना मोबाइल फोन के, इस बंकर में पहुंचे। वे जानते थे कि इजराइली खुफिया एजेंसी मोसाद उनके फोन ट्रैक कर सकती है। हालांकि, ईरान की तरफ से हुई एक छोटी सी चूक ने मोसाद को ये मौका दे भी दिया। न्यू यॅार्क टाइम्स के मुताबिक ये मौका था बंकर के बाहर इंतजार कर रहे सुरक्षाकर्मियों के मोबाइल फोन। दरअसल, सुरक्षाकर्मी अपने फोन साथ लाए थे। उन्होंने न सिर्फ फोन का इस्तेमाल किया, बल्कि सोशल मीडिया पर पोस्ट भी किए। इजरायली खुफिया एजेंसी ने इन फोन को हैक कर लिया और पता लगा लिया कि ईरान के शीर्ष नेता कहां इकट्ठा हैं। बंकर के दरवाजों को निशाना बनाया, दम घोंट कर मारना चाहता था इसके बाद इजराइली मिसाइलों ने बंकर के आने-जाने के रास्तों और वेंटिलेशन सिस्टम को निशाना बनाया था, ताकि अंदर मौजूद लोगों को बाहर निकलने से रोका जा सके और उन्हें दम घोंटू माहौल में फंसाया जा सके। हमले के बाद इमारत की बिजली भी काट दी गई, लेकिन वहां पहले से बनाए गए एक इमरजेंसी गेट की मदद से राष्ट्रपति और बाकी बड़े अधिकारी बाहर निकलने में सफल रहे। भागने के दौरान पजशकियान के पांव में चोट लग गई थी। वहीं, दूसरे अधिकारियों को भी हल्की चोटें आईं। पजशकियान ने बाद में बताया कि उन्होंने मलबे में एक छोटा सा छेद देखा, जहां से हवा आ रही थी। उन्होंने अपने हाथों से मलबा हटाया और सभी को एक-एक करके बाहर निकाला। ईरानी अधिकारियों के अनुसार, 'हमारे वरिष्ठ अधिकारी और कमांडर फोन नहीं लाते थे। लेकिन उनके ड्राइवर और सुरक्षाकर्मी फोन लाते थे। उन्होंने सुरक्षा नियमों को गंभीरता से नहीं लिया। यही उनकी सबसे बड़ी गलती थी, और इजराइल ने इसका पूरा फायदा उठाया।' 2022 से ही ईरान के परमाणु वैज्ञानिकों पर नजर रख रहा था इजराइल यह हमला इजराइल की उस बड़ी रणनीति का हिस्सा था, जिसके तहत उसने ईरान की सुरक्षा और खुफिया व्यवस्था को भेदने की कोशिश की। इजराइल ने टैक्नॉलाजी का सहारा लेने के साथ-साथ ईरान में अपने जासूसों और ऑपरेटरों का जाल भी बिछाया। जंग के पहले हफ्ते में इजराइल ने कई परमाणु वैज्ञानिकों और सैन्य कमांडरों को निशाना बनाया। इजरायली अधिकारियों के मुताबिक, उन्होंने 2022 से ही ईरान के परमाणु वैज्ञानिकों पर नजर रख रखी थी। 14 ईरानी वैज्ञानिकों को इजराइल ने मार गिराया रिपोर्ट के मुताबिक अक्टूबर,2024 में ही इजराइल, ईरान के परमाणु वैज्ञानिकों को मारने की योजना बना चुका था, लेकिन अमेरिकी सरकार के साथ टकराव से बचने के लिए रुक गए। इस साल जनवरी से जून तक, इजराइल की एक 'डिकैपिटेशन टीम' ने ईरानी परमाणु प्रोजेक्ट के 400 वैज्ञानिकों की सूची बनाई। इसे घटाकर 100 नामों तक सीमित किया गया। इनमें से 14 वैज्ञानिकों को इजराइल ने जंग के पहले ही दिन यानी 13 जून को मार गिराया। इसके साथ ही, इजराइल ने 'ऑपरेशन रेड वेडिंग' नाम से एक और योजना चलाई, जिसका मकसद था ईरान के वरिष्ठ सैन्य कमांडरों को खत्म करना। इस ऑपरेशन का पहला निशाना था रिवॉल्युशनरी गार्ड्स की एयरोस्पेस फोर्स का कमांडर, ब्रिगेडियर जनरल अमीर अली हाजीजादेह। इजराइल का प्लान था कि युद्ध की शुरुआत में ही 20-25 बड़े लोगों को मार दिया जाए। ईरान ने लीडर के लिए सोशल मीडिया बैन किया था रिपोर्ट के मुताबिक, ईरानी अधिकारियों को लंबे समय से शक था कि इजराइल उनके शीर्ष कमांडरों और वैज्ञानिकों की गतिविधियों पर नजर रख रहा है। इजराइल ने 1 अक्टूबर 2024 को बेरूत में नसरल्लाह के सीक्रेट बंकर पर हमला किया था। वह हिजबुल्लाह के टॉप कमांडरों के साथ मीटिंग कर रहे थे। 64 साल के नसरल्लाह की जहरीले धुएं में दम घुटने से मौत हो गई थी। इसके बाद ईरान ने ऊंचे पदों पर बैठे लोगों के लिए स्मार्टफोन, सोशल मीडिया और व्हाट्सएप जैसे ऐप्स पर पूरी तरह बैन कर दी थी। हालांकि, सुरक्षाकर्मियों पर यह नियम लागू नहीं हुआ। 13 जून को शुरू हुए जंग के बाद सुरक्षाकर्मियों के लिए भी स्मार्टफोन बैन कर दिए गए। अब वे केवल वॉकी-टॉकी इस्तेमाल कर सकते हैं। लेकिन 16 जून की बैठक में किसी ने नियम तोड़ा और फोन साथ ले गया, जिससे इजराइल को हमला करने का मौका मिल गया। ---------------------------------- ये खबर भी पढ़ें... रूसी हमले में यूक्रेन का सबसे बड़ा जहाज डूबा: VIDEO... पहली बार समुद्री ड्रोन से हमला किया, 10 साल पहले जासूसी के लिए बनाया गया था यूक्रेनी नेवी का सबसे बड़ा जहाज सिम्फेरोपोल गुरुवार को रूस के समुद्री ड्रोन हमले में डूब गया। यह जानकारी स्पूतनिक न्यूज एजेंसी ने रूसी रक्षा मंत्रालय के हवाले से दी है। यह जहाज पिछले 10 साल में यूक्रेन का सबसे बड़ा जहाज था। यह लैगून-क्लास जहाज (तटीय इलाके का जहाज) था, जिसे जासूसी के लिए बनाया गया था। पूरी खबर पढ़ें...