साइबर लिटरेसी- गूगल पर सर्च न करें कस्टमर केयर नंबर:हो सकते हैं साइबर फ्रॉड का शिकार, फेक कस्टमर केयर की ऐसे करें पहचान

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गूगल दुनिया का सबसे बड़ा सर्च इंजन है, जहां लगभग हर सवाल का जवाब मिल जाता है। अक्सर लोग बैंक, किसी कंपनी या विभाग से जुड़ी जानकारी के लिए कस्टमर केयर नंबर गूगल पर सर्च करते हैं, लेकिन इस प्रोसेस में फ्रॉड या फर्जी नंबर मिलने का खतरा रहता है। दरअसल यह जरूरी नहीं है कि गूगल पर उपलब्ध हर नंबर सही या आधिकारिक हो। कई बार साइबर अपराधी गूगल पर फर्जी कस्टमर नंबर डालकर लोगों को धोखा देते हैं और उनका बैंक अकाउंट खाली कर देते हैं। इसलिए किसी भी कंपनी का कस्टमर केयर नंबर सर्च करते समय बेहद सतर्क और सावधान रहने की जरूरत है। तो चलिए, आज ‘साइबर लिटरेसी’ कॉलम में बात करेंगे कि कस्टमर केयर के नाम पर कैसे स्कैम होता है? साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट: राजेश दंडोतिया, एडिशनल डीसीपी, क्राइम ब्रांच, इंदौर राहुल मिश्रा, साइबर सिक्योरिटी एडवाइजर, उत्तर प्रदेश पुलिस सवाल- गूगल पर कस्टमर केयर नंबर सर्च क्यों नहीं करना चाहिए? जवाब- गूगल उन कस्टमर केयर नंबर को ऊपर दिखाता है, जो उसकी एल्गोरिदम, SEO (सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन) और एडवर्टाइजमेंट के आधार पर रैंक होते हैं। इसमें सही और आधिकारिक कस्टमर केयर नंबर भी हो सकते हैं, लेकिन साइबर अपराधी नकली वेबसाइट और पेड एडवर्टाइजमेंट के जरिए फर्जी नंबर टॉप पर दिखा सकते हैं। सवाल- फर्जी कस्टमर केयर नंबर के जरिए स्कैमर्स लोगों को कैसे ठगते हैं? जवाब- जब कोई यूजर किसी शिकायत या सर्विस से जुड़ी जानकारी के लिए गूगल पर दिए कस्टमर केयर नंबर पर कॉल करता है तो साइबर क्रिमिनल अलग-अलग तरीकों से उसे ठगने की कोशिश करते हैं। इसे इन उदाहरणों से समझ सकते हैं। सवाल- गूगल के फर्जी कस्टमर केयर नंबर की पहचान कैसे कर सकते हैं? जवाब- असली कस्टमर एजेंट कभी भी आपकी सेंसिटिव जानकारी नहीं मांगते हैं।। अगर कोई व्यक्ति नीचे ग्राफिक में दी गई जानकारियां मांगता है तो समझ लें कि वह फ्रॉड कॉल है। सवाल- सही कस्टमर केयर नंबर निकालने के लिए क्या करें? जवाब- जिस कंपनी का कस्टमर केयर नंबर चाहिए, हमेशा उसकी आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं। इसके अलावा कई कंपनियां अपने एप के हेल्प सेक्शन में सही कस्टमर केयर नंबर देती हैं। हमेशा उन नंबर्स पर ही संपर्क करें। अगर किसी प्रोडक्ट से संबंधित कोई शिकायत है तो उसके बॉक्स, बिल या यूजर मैनुअल में दिए हेल्पलाइन नंबर पर ही संपर्क करें। कुछ कंपनियों के आधिकारिक फेसबुक, ट्विटर (X) या लिंक्डइन प्रोफाइल पर सही जानकारी मिल सकती है। सवाल- कौन-कौन सी सर्विस के गूगल पर फर्जी कस्टमर केयर नंबर होने की संभावना अधिक होती है? जवाब- गूगल पर फर्जी कस्टमर केयर नंबर्स की संभावना उन सर्विसेज में अधिक होती है, जिनमें वित्तीय लेन-देन, अकाउंट सिक्योरिटी और तुरंत हेल्प की मांग होती है। इसे नीचे दिए ग्राफिक से समझिए- सवाल- क्या गूगल पर किसी कंपनी का ऑफिशियल कस्टमर केयर नंबर लिखकर सर्च करने से सही नंबर मिल सकता है? जवाब- ऐसा करने से सही नंबर मिलने की संभावना होती है, लेकिन यह 100% सही हो, ऐसा जरूरी नहीं है। इसलिए हमेशा ऑफिशियल वेबसाइट या एप पर ही कस्टमर केयर नंबर करें। सवाल- फेक कस्टमर केयर से बचने के लिए किन बातों का ध्यान रखना चाहिए? जवाब- अगर किसी कंपनी का कस्टमर केयर आपसे OTP या बैंक से जुड़ी सेंसिटिव जानकारी मांग रहा है तो उसे कभी न बताएं। इसके अलावा आधार नंबर, ATM का पिन या मोबाइल स्क्रीन शेयर ना करें। अगर कस्टमर किसी एप को डाउनलोड करने के लिए लिंक भेजता है तो उस पर भरोसा न करें। ऐसे एप आपका डेटा चोरी कर सकते हैं। सवाल- क्या ट्रूकॉलर (Truecaller) से सही कस्टमर केयर नंबर का पता चल सकता है? जवाब- ट्रूकॉलर एक यूजर-कंट्रिब्यूटेड एप है। इसलिए नंबर की जानकारी कंपनी द्वारा अपडेट नहीं भी हो सकती है। इसलिए आधिकारिक वेबसाइट या एप से क्रॉस-चेक करना जरूरी है। कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है। ट्रूकॉलर पर अगर नंबर के पास ब्लू टिक या वेरिफाइड बैज है तो संभावना है कि वह असली हो। सवाल- फेक कस्टमर केयर स्कैम का शिकार होने पर कहां शिकायत करें? जवाब- फेक कस्टमर केयर स्कैम का शिकार होने पर नजदीकी पुलिस स्टेशन में शिकायत देकर प्राथमिकी दर्ज करवाएं। इसके अलावा नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल www.cybercrime.gov.in पर ऑनलाइन रिपोर्ट दर्ज कराएं। अगर आपके अकाउंट से पैसे कटे हैं या फिर फाइनेंशियल जानकारी स्कैमर्स तक पहुंच गई है तो तुरंत अपने बैंक से संपर्क करें। साथ ही संबंधित कंपनी को भी सूचित करें ताकि वे इस फर्जी नंबर से सावधान रहें। …………………..ये खबर भी पढ़िए...न्यूजीलैंड की सांसद ने संसद में दिखाई अपनी डीपफेक न्यूड:AI से 5 मिनट में बन रही हैं फेक तस्वीरें, कैसे बचें, जानिए 10 सावधानियां आज सोशल मीडिया और इंटरनेट की दुनिया में डीपफेक सिर्फ एक टेक्नोलॉजी नहीं, एक खतरनाक हथियार बन चुका है। इसका इस्तेमाल किसी की छवि बिगाड़ने, करियर को नुकसान पहुंचाने या एजेंटा बनाने के लिए हो सकता है। खासकर युवाओं, महिलाओं और किशोरियों को इसका सबसे अधिक खतरा है। पूरी खबर पढ़िए...