जरूरत की खबर- नाजुक कंधों पर भारी बस्ते का बोझ:डॉक्टर की चेतावनी, हैवी वेट का स्पाइन पर बुरा असर, ध्यान रखें ये 11 बातें

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आजकल बहुत से स्कूली बच्चे और टीनएजर्स कम उम्र में ही रीढ़ की हड्डी में दर्द, कंधों में खिंचाव और पीठ में तकलीफ जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। इसका एक बड़ा कारण भारी स्कूल बैग है। हर दिन बच्चों के कंधों पर लटकने वाला ये बैग उनकी सेहत, पोश्चर और ग्रोथ पर सीधा असर डालता है। नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन में छपी एक स्टडी के मुताबिक, बच्चे अक्सर अपने शरीर के वजन का 10% से लेकर 25% तक वजन स्कूल बैग के रूप में ढोते हैं और ये शरीर के लिए खतरे की घंटी है। भारी बैग बच्चों की रीढ़ की हड्डी के संतुलन को बिगाड़ सकता है, जिससे उनकी शारीरिक विकास प्रक्रिया पर भी असर पड़ता है। तो चलिए, जरूरत की खबर में आज जानेंगे कि सही स्कूल बैग कैसा होना चाहिए? साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट: डॉ. हितेश भंडारी, कंसल्टेंट ऑर्थोपेडिक, इंडियन स्पाइनल इंजरीज सेंटर (ISIC), नई दिल्ली सवाल- भारी स्कूल बैग बच्चों की सेहत के लिए कितना खतरनाक हैं? जवाब- एक दिन में औसतन एक स्कूल बच्चा लगभग 8 अलग-अलग विषय पढ़ता है। इसका मतलब है कि बच्चे कम-से-कम 8 अलग-अलग किताबें लेकर चलते हैं, और इसमें नोटबुक, वर्कशीट और अन्य जरूरी चीजें शामिल नहीं हैं। ऐसे में हर रोज 20-25 मिनट तक भी भारी बैग ढोने का असर बच्चों की पीठ पर पड़ता है और अक्सर वे पीठ दर्द की शिकायत करते हैं। आमतौर पर लड़कियों में यह दर्द लड़कों की तुलना में ज्यादा होता है। जो बच्चे विशेष रूप से भारी बैग उठाते हैं, वे अक्सर आगे की ओर झुककर चलते हैं ताकि बैग के भार को संतुलित कर सकें। इससे शरीर का पोस्चर (मुद्रा) असामान्य हो जाता है। भारी बैग की वजह से हंचबैक (झुकी हुई कमर) या रीढ़ की हल्की टेढ़ी-मेढ़ी बनावट हो सकती है, लेकिन यह तब तक स्थायी रूप से विकृति नहीं बनती जब तक कि बच्चे को पहले से कोई रीढ़ की समस्या, जैसे कि स्कोलियोसिस, न हो। अगर किसी बच्चे को पहले से रीढ़ की बीमारी है, लेकिन माता-पिता को इसका पता नहीं है तो रोजाना भारी बैग उठाना उस हालत को और खराब कर सकता है। सवाल- भारी बैग होने के क्या संकेत होते हैं? जवाब- अगर बच्चे को पीठ, कंधे या टांगों में दर्द होने लगे तो यह संकेत हो सकता है कि उसका बैग बहुत भारी है। इसके अलावा कुछ और संकेत हैं। अगर दर्द ज्यादा हो या लगातार बना रहे तो बच्चे को डॉक्टर को जरूर दिखाएं ताकि कोई गंभीर समस्या न हो। सवाल- एक कंधे पर लगातार बैग टांगने से भी पॉस्चर पर असर पड़ता है? जवाब- रिचर्सगेट में 'ह्यूमेन फैक्टर: द जर्नल ऑफ द ह्यूमन फैक्टर्स एंड इरगोनोमिक्स सोसाइटी' में एक स्टडी की गई थी। इस स्टडी का मकसद यह जानना था कि जब बच्चे अपने वजन के 10% के बराबर भारी बैग उठाते हैं तो इसका उनके शरीर के पोस्चर और रीढ़ की हड्डी पर क्या असर पड़ता है। खासतौर पर यह देखा गया कि जब बच्चे बैग को एक ही कंधे पर लटकाते हैं तो शरीर का संतुलन कैसे बिगड़ता है। स्टडी में 11 से 13 साल की उम्र के 162 स्कूल बच्चों को शामिल किया गया। जब बच्चों ने बैग को एक कंधे पर टांगा तो पाया गया कि शरीर दूसरी दिशा में झुकने लगा। दोनों कंधों का संतुलन बिगड़ गया। एक कंधा नीचे लटक गया। दाएं कंधे पर बैग रखने से रीढ़ दाईं ओर ज्यादा मुड़ी और बाएं कंधे पर रखने से बाईं ओर झुकाव बढ़ा। इससे पता चलता है कि भले ही बैग का वजन सुरक्षित माना गया हो (बच्चे के वजन का 10%), लेकिन अगर वह एक ही कंधे पर लटकाया जाए तो यह रीढ़ और शरीर की मुद्रा पर बुरा असर डाल सकता है। सवाल- भारी स्कूल बैग बच्चों की मानसिक सेहत पर क्या असर डालता है? जवाब- भारी बैग बच्चे की मानसिक सेहत पर बुरा असर डाल सकता है। इससे बच्चे में चिड़चिड़ापन, बेचैनी और स्कूल से दूरी जैसी भावना ला सकते हैं। लंबे समय तक ऐसा चलता रहा तो बच्चे का पढ़ाई में मन लगना बंद हो सकता है और उसकी सेहत भी कमजोर हो सकती है। सवाल- डॉक्टर बच्चों के भारी बैग से होने वाले असर को लेकर क्या सलाह देते हैं? जवाब- डॉ. हितेश भंडारी बताते हैं कि बच्चों को भारी बैग से बचाने के लिए कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए। इसे नीचे दिए ग्राफिक से समझिए- सवाल- क्या छोटे बच्चों और टीनएजर्स पर भारी बैग का असर अलग-अलग होता है? जवाब- हां, दोनों उम्र के बच्चों पर असर अलग-अलग तरीके से पड़ता है। छोटे बच्चे (5–10 साल) इस उम्र में हड्डियां और मांसपेशियां अभी विकास की शुरुआती अवस्था में होती हैं। उनका बोन स्ट्रक्चर नरम और लचीला होता है। ऐसे में भारी बैग का दबाव तुरंत असर दिखा सकता है जैसे झुकी हुई पीठ, जल्दी थकान, बार-बार पीठ या कंधे में दर्द होना। चूंकि उनका शरीर पूरी तरह से मजबूत नहीं होता, इसलिए छोटे बच्चों को चोट या पोस्चर की गड़बड़ी का खतरा जल्दी होता है। टीनएजर्स (11–16 साल) इस उम्र में हड्डियों की ग्रोथ तेज होती है और मांसपेशियां मजबूत बनने लगती हैं। भारी बैग का असर तुरंत नहीं दिखता, लेकिन धीरे-धीरे गलत पोस्चर (जैसे लगातार झुककर चलना, कंधे का असंतुलन) बन सकता है। अगर यह लंबे समय तक चलता रहा तो रीढ़ की हड्डी स्थायी रूप से टेढ़ी-मेढ़ी हो सकती है या पीठ दर्द क्रॉनिक (लगातार रहने वाली) समस्या बन सकती है। सवाल- क्या बैग की ऊंचाई और स्ट्रैप की लंबाई से फर्क पड़ता है? जवाब- हां, अगर बैग बहुत नीचे लटकता है या स्ट्रैप ढीले होते हैं तो बैग का वजन पीठ पर ज्यादा दबाव डालता है। सही तरीका यह है कि बैग कमर से ऊपर रहे और दोनों स्ट्रैप बराबर कसे हों। ……………………. ये खबर भी पढ़िए... जरूरत की खबर- बच्चों को कभी न लगाएं परफ्यूम:डॉक्टर की चेतावनी, परफ्यूम से हो सकती है एलर्जी, स्किन रिएक्शन और गंभीर हेल्थ इश्यू बच्चों को खास मौकों पर अच्छा महकता हुआ महसूस कराना हर पेरेंट चाहता है। इसके लिए अक्सर पेरेंट्स अच्छी खुशबू वाला परफ्यूम, बॉडी स्प्रे या सेंट इस्तेमाल करते हैं। बच्चों का शरीर और स्किन बड़ों की तुलना में कहीं ज्यादा सेंसिटिव होती है, इसलिए इनके लिए परफ्यूम का चुनाव और इस्तेमाल बेहद सोच-समझकर करना जरूरी है। पूरी खबर पढ़िए...