पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद चुनाव आयोग ने विचारधीन करीब 60 लाख मतदाताओं का डेटा जारी किया. 32.68 लाख को मतदान के योग्य और 27.16 लाख को अयोग्य माना गया. द क्विंट ने अयोग्य माने गए मतदाताओं का जिलेवार विश्लेषण कर ऐसे 5 प्वॉइंट्स निकाले, जो बताते हैं कि पश्चिम बंगाल के साल 2021 के विधानसभा चुनाव, SIR में अयोग्य मतदाता और 2026 चुनाव के नतीजों का क्या कनेक्शन है. अयोग्य मतदाता कैसे नतीजों को प्रभावित कर सकते हैं? 1. जिन 5 जिलों से TMC ने 110 सीटें जीतीं, 50% अयोग्य वोटर वहीं से डिलीटयह आंकड़ा बताता है कि टीएमसी की एकतरफा जीत वाले जिलों में सबसे ज्यादा अयोग्य मतदाता डिलीट किए गए. साल 2021 में टीएमसी ने 215 में से 110 सीटें सिर्फ 5 जिलों दक्षिण 24 परगना, उत्तर 24 परगना, मुर्शिदाबाद, पूर्व बर्दवान और हावड़ा से जीती थीं. पूरे राज्य में कुल 27.16 लाख में से 13.45 लाख (लगभग 49.53%) वोटर सिर्फ इन्हीं 5 जिलों से हैं. इन 5 जिलों में कुल 118 विधानसभा सीटें हैं.मुर्शिदाबाद: 2021 के विधानसभा चुनाव में टीएमसी ने 22 में से 20 सीटें जीतीं, और अकेले इसी जिले से राज्य में सबसे ज्यादा 4,55,137 अयोग्य वोटर.उत्तर 24 परगना: उत्तर 24 परगना में टीएमसी ने 33 में से 28 सीटें जीतीं थीं और यहां से 3,25,666 वोटर अयोग्य पाए गए.दक्षिण 24 परगना: दक्षिण 24 परगना में टीएमसी को 31 में से 30 सीटों पर जीत मिली थी और यहां से 2,22,929 वोटर अयोग्य बताकर डिलीट किए गए.पूर्व बर्दवान: पूर्व बर्दवान में टीएमसी ने सभी 16 सीटों पर क्लीन स्वीप किया था और यहां से 2,09,805 वोटर अयोग्य घोषित किए गए.हावड़ा: हावड़ा में भी टीएमसी ने सभी 16 की 16 सीटों पर जीत दर्ज की थी और यहां से 1,32,151 मतदाता अयोग्य पाए गए. 2. जिन 7 जिलों में बीजेपी का दबदबा, वहां से पूरे राज्य के मात्र 10% वोटर ही अयोग्यपश्चिम बंगाल चुनाव 2021 में जिन 7 जिलों दार्जिलिंग, कूचबिहार, अलीपुरद्वार, कलिम्पोंग, जलपाईगुड़ी, बांकुड़ा और पूर्व मेदिनीपुर में बीजेपी ने टीएमसी के मुकाबले ज्यादा वोट हासिल किए थे, वहां की मतदाता सूची में अयोग्य मतदाता कम पाए गए. बीजेपी के प्रभाव वाले इन सभी 7 जिलों को मिलाकर 2.64 लाख (10%) वोटर ही अयोग्य घोषित हुए.दार्जिलिंग, कलिम्पोंग और अलीपुरद्वार में सबसे कम डिलीशन: 2021 में दार्जिलिंग जिले की 5 सीटों में से टीएमसी ने 3 सीटों (माटीगाड़ा-नक्सलबाड़ी, सिलीगुड़ी, फांसीदेवा) पर सीधे चुनाव लड़ा और बाकी 2 सीटें सहयोगी दल को छोड़ीं. कलिम्पोंग की एकमात्र सीट पर भी उसने खुद उम्मीदवार नहीं उतारा. अलीपुरद्वार जिले की सभी 5 सीटों पर टीएमसी ने सीधे चुनाव लड़ा, लेकिन हर सीट पर दूसरे नंबर पर रही. इन तीनों जिलों में बीजेपी ने एकतरफा क्लीन स्वीप किया.दार्जिलिंग जिले में बीजेपी को टीएमसी से भारी अंतर से 2,76,527 वोट ज्यादा मिले थे, इस पूरे जिले में सिर्फ 44,230 वोटर अयोग्य पाए गए. अलीपुरद्वार में बीजेपी ने टीएमसी से 89,259 वोट ज्यादा हासिल किए थे और यहां मतदाता सूची से मात्र 36,078 वोटर ही अयोग्य पाए गए.बांकुड़ा और पूर्व मेदिनीपुर में भी बहुत कम अयोग्य मतदाता: बांकुड़ा जिले की कुल 12 सीटों में से बीजेपी ने 8 सीटें जीतीं और टीएमसी को 4 सीटें मिलीं थी. इस जिले में बीजेपी को टीएमसी के मुकाबले 26,658 वोट ज्यादा मिले थे.16 सीटों वाले पूर्व मेदिनीपुर जिले में टीएमसी ने 9 और बीजेपी ने 7 सीटें जीतीं, लेकिन कुल वोटों के मामले में बीजेपी को टीएमसी से 1,753 वोट अधिक मिले थे. WB SIR- एडजुडिकेशन में 45% वोटर अयोग्य, मुस्लिम बहुल मुर्शिदाबाद ज्यादा प्रभावित3. "डिलीशन मार्जिन" टीएमसी के "वोट के मार्जिन" से कई गुना बड़ासाल 2021 में पश्चिम बंगाल के कई जिलों में पार्टियों (टीएमसी और बीजेपी के बीच) को मिले कुल वोटों का अंतर 5% से नीचे था. इन जिलों में अयोग्य हुए वोटरों की संख्या टीएमसी को बीजेपी से ज्यादा मिले वोटों के मार्जिन से बहुत ज्यादा है. नदिया (Nadia) - इस जिले में 17 विधानसभा सीटें हैं, जिसमें से 2021 में बीजेपी ने 9 और टीएमसी ने 8 सीटें जीती थीं. तब नदिया जिले में टीएमसी को कुल मिले वोट बीजेपी को कुल मिले वोटों से सिर्फ 20,903 अधिक थे (0.57% का मार्जिन). अब SIR में यहां से 2,08,626 वोटरों को अयोग्य बताकर डिलीट कर दिया गया. यानी वोट मार्जिन से 10 गुना ज्यादा.पश्चिम बर्दवान (Paschim Bardhaman) - यहां 9 विधानसभा सीटों में से 2021 में 6 टीएमसी और 3 बीजेपी जीती थी. तब इस जिले से टीएमसी को बीजेपी से सिर्फ 2.68% (43,893 वोट) की लीड मिली थी. अब SIR में यहां से 74,100 वोटर अयोग्य पाए गए, जो टीएमसी की लीड से करीब 30 हज़ार अधिक हैं.दक्षिण दिनाजपुर (Dakshin Dinajpur) - 6 विधानसभा सीटों में से दोनों पार्टियों को साल 2021 में 3-3 सीटें मिली थीं. इस जिले से टीएमसी को मात्र 4.19% (44,945 वोट) की लीड मिली थी. अब यहां 76,768 वोटर अयोग्य पाए गए हैं. लीड से लगभग 31 हजार से भी ज्यादा.ऊपर बताए गए 3 जिलों में कुल मिलाकर 32 विधानसभा सीटें हैं. यहां अयोग्य वोटरों की संख्या टीएमसी की कुल लीड से काफी बड़ी है, इसलिए इन बेहद करीबी जिलों में टीएमसी-बीजेपी के लिए अयोग्य वोटर काफी निर्णायक हो सकते हैं. 4. 'क्लीन स्वीप' वाले जिलों में टीएमसी का 'ओवरऑल वोट मार्जिन' खतरे में?तीसरे पॉइंट में हमने 2021 के चुनाव में 'कांटे की टक्कर' वाले जिलों की बात की थी, लेकिन जिन जिलों में टीएमसी ने 100% सीटें (क्लीन स्वीप) जीती थीं, वहां भी कुल अयोग्य वोटरों की संख्या टीएमसी की कुल बढ़त (Total Lead) के बेहद करीब पहुंच गई है. साल 2021 के चुनाव में पश्चिम बंगाल में कुल 5 ऐसे जिले थे पूर्व बर्दवान (16), हावड़ा (16), कोलकाता नॉर्थ (7), कोलकाता साउथ (4), और झारग्राम (4) जहां टीएमसी ने 100% (क्लीन स्वीप) जीत दर्ज करते हुए सभी 47 विधानसभा सीटों पर कब्जा किया था.इसके अलावा उत्तर दिनाजपुर और हुगली जैसे जिले थे, जहां टीएमसी ने एकतरफा (लगभग 80%) जीत हासिल की थी.लेकिन SIR के बाद अयोग्य मतदाताओं की जिलेवार सूची बताती है कि टीएमसी के लिए 'सेफ' माने जाने वाले गढ़ों में भी कुल अयोग्य वोटरों की संख्या, टीएमसी की कुल बढ़त (Total Lead) के बेहद करीब पहुंच गई है या उसके आधे से भी ज्यादा हो चुकी है. पूर्व बर्दवान : साल 2021 में पूर्व बर्दवान जिले में विधानसभा की सभी 16 सीटें टीएमसी ने जीती थीं. पूरे जिले में टीएमसी को बीजेपी के मुकाबले कुल 2,75,905 वोटों की भारी बढ़त (Lead) मिली थी. लेकिन अब इस जिले से 2,09,805 वोटरों को अयोग्य मानकर हटा दिया गया है.उत्तर दिनाजपुर: 2021 में इस जिले की 9 में से 7 सीटें टीएमसी ने जीतीं. टीएमसी की जिलेभर में कुल बढ़त 2,74,944 वोटों की थी. लेकिन यहां से 1,76,972 वोटर अयोग्य बताकर डिलीट कर दिए गए.हुगली: हुगली जिले की 18 सीटों में से टीएमसी ने 14 सीटों पर भारी जीत दर्ज की थी. पूरे जिले में टीएमसी को बीजेपी से 2,79,890 वोट ज्यादा मिले थे. लेकिन हुगली में जिन वोटरों की जांच हुई, उनमें से 70.33% यानी 1,20,813 वोटर अयोग्य पाए गए. हावड़ा - साल 2021 में हावड़ा जिले की सभी 16 विधानसभा सीटों पर टीएमसी ने क्लीन स्वीप किया था. पूरे जिले में टीएमसी को बीजेपी के मुकाबले कुल 4,54,873 वोटों की बढ़त मिली थी. लेकिन मतदाता सूची के इस जिले से 1,32,151 वोटरों को अयोग्य बताकर डिलीट कर दिया गया. पूर्व बर्दवान और उत्तर दिनाजपुर के साथ-साथ हावड़ा, मालदा और हुगली के उदाहरण बताते हैं कि टीएमसी की एकतरफा जीत वाले 'सुरक्षित किलों' पर भी अयोग्य घोषित वोटरों का असर पड़ सकता है.पश्चिम बंगाल SIR: महिलाओं का ज्यादा डिलीशन, किस विधानसभा में सबसे ज्यादा नाम कटे5. मुस्लिम आबादी और अयोग्य वोटर डिलीशन का पैटर्नपश्चिम बंगाल के जिन जिलों में मुस्लिम आबादी का प्रतिशत अधिक है (जो 2021 में टीएमसी के सबसे बड़े और एकतरफा गढ़ साबित हुए), वहीं से सबसे बड़ी संख्या में अयोग्य वोटर बताए जा रहे हैं. जिन जिलों में मुस्लिम आबादी कम है, वहां अयोग्य वोटर भी कम हैं.पुरुलिया और बांकुड़ा राज्य सबसे कम मुस्लिम आबादी वाले जिलों में से हैं. पुरुलिया में 7.76% और बांकुड़ा में 8.08% मुस्लिम आबादी है. इन दोनों जिलों में अयोग्य वोटरों (डिलीशन) का प्रतिशत पूरे राज्य में सबसे कम क्रमशः 17.69% और 16.70%—दर्ज किया गया है.पूर्व मेदिनीपुर (14.59% मुस्लिम आबादी) में भी डिलीशन रेट मात्र 24.43% रहा है. ये वही जिले हैं जहां बीजेपी ने बेहतरीन प्रदर्शन किया था.मुर्शिदाबाद जिले में राज्य की सर्वाधिक 66.27% मुस्लिम आबादी है. इसी मुर्शिदाबाद (जहां टीएमसी ने 22 में से 20 सीटें जीतीं थी) से पूरे राज्य में सबसे ज्यादा 4,55,137 वोटर अयोग्य पाए गए (41.80% डिलीशन).Exclusive: UP SIR में पुरुषों से 15% ज्यादा महिलाओं के नाम कटे, ग्रामीण प्रभावित