World Parkinson's Day 2026: शरीर में कंपकंपी से पहले ही दिखने लगते हैं पार्किंसंस के ये लक्षण, पहचानने में न करें देरी

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World Parkinson's Day 2026: पार्किंसंस एक ऐसी न्यूरोलॉजिकल बीमारी है जो ब्रेन में Dopamine नामक केमिकल की कमी के कारण होती है. अधिकतर लोग शरीर में होने वाली कंपकंपी और झटकों को ही इसका पहला लक्षण मान लेते हैं, लेकिन असल में कई ऐसे छोटे-छोटे संकेत होते हैं जो बरसों पहले से ही दिखाई देने लगते हैं, जिन्हें लोग नजरअंदाज कर देते हैं. पार्किंसंस के इन शुरुआती संकेतों को पकड़ना बेहद जरूरी होता है, जिन्हें लोग आमतौर पर दरकिनार कर देते हैं.क्या होता है पार्किंसंसपार्किंसंस, ब्रेन से जुड़ी एक गंभीर बीमारी है जो धीरे-धीरे बढ़ते रहती है. यह मुख्य रूप से शरीर के मूवमेंट को प्रभावित करती है. यह तब होता है जब ब्रेन की वे cells नष्ट होने लगती हैं जो Dopamine नामक केमिकल बनाती हैं. Dopamine शरीर के मसल्स को कंट्रोल करने और तालमेल बनाए रखने के लिए जरूरी होता है. यह सिर्फ बुजुर्गों को ही नहीं, बल्कि जवान लोगों को भी हो सकती है, जिससे इसके लक्षणों को जानना और भी जरूरी हो जाता है.यह भी पढ़ें - Silent Heart Attack Risk: 80% मरीज 'लो-रिस्क' थे, फिर भी आया हार्ट अटैक! जानें क्यों फेल हो रहे विदेशी मेडिकल फॉर्मूले?लिखावट (Hand writing) का छोटा होना - अगर आपकी लिखावट अचानक से छोटी होने लगे या शब्द एक-दूसरे से सटे हुए दिखने लगें, तो यह पार्किंसंस के प्रबल लक्षण हो सकते हैं.सूंघने की क्षमता कम होना - गंध महसूस न होना या इलायची जैसी तेज गंध देने वाली चीजों की महक न आना इस बीमारी के सबसे पुराने लक्षणों में से एक माना जा सकता है. इस तरह के लक्षण अक्सर कंपकंपी से पहले ही दिखाई देने लगते हैं.चेहरे के भाव कम होना - चेहरे के मसल्स में जकड़न आने के कारण इंसान का चेहरा हमेशा गंभीर या भावहीन दिखने लगता है, भले ही वह उदास न हो. पलकें झपकने की दर में भी कमी दिखने लगती है.नींद की दिक्कत - सोने के दौरान बहुत ज्यादा हिलना-डुलना, चिल्लाना या सपने में होने वाली हरकतों को असलियत में करना, जैसे हाथ-पैर चलाना, खतरे की घंटी साबित हो सकती है.पाचन तंत्र - पाचन तंत्र की धीमी गति या बार-बार कब्ज जैसी समस्याएं होना भी इसके शुरुआती लक्षणों में से एक माने जा सकते हैं.यह भी पढ़ें - Good vs Bad Cholestrol: गुड और बैड कोलेस्ट्रॉल का खेल, क्या आप जानते हैं असली जोखिम कहां है?