सुनवाई के दौरान नारायण की ओर से भी आवेदन दिया गया था कि वह 2013 से जेल में हैं, और बिना उनके पक्ष को सुने भरण-पोषण की राशि तय की गई थी। उन्होंने इसे कम करने की गुहार लगाई थी।