Ethanol Stove: आज के समय में महंगे गैस सिलेंडर और बढ़ती ईंधन कीमतों के बीच एथेनॉल स्टोव एक सस्ता और पर्यावरण के अनुकूल विकल्प बनकर सामने आ रहा है. यह स्टोव खास तरह के बायोफ्यूल यानी एथेनॉल पर चलता है जो गन्ने, मक्का या अन्य कृषि उत्पादों से तैयार किया जाता है. ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में इसे एक बेहतर विकल्प के रूप में देखा जा रहा है.किस टेक्नोलॉजी पर काम करता है एथेनॉल स्टोव?एथेनॉल स्टोव की तकनीक काफी सरल लेकिन प्रभावी होती है. इसमें लिक्विड एथेनॉल को एक सुरक्षित टैंक में भरा जाता है. जब स्टोव को जलाया जाता है तो एथेनॉल वाष्प (vapour) में बदलकर जलता है और नीली लौ पैदा करता है जो काफी साफ होती है.इसमें खास बर्नर डिजाइन का इस्तेमाल किया जाता है जो ईंधन को नियंत्रित तरीके से जलने देता है. कई आधुनिक एथेनॉल स्टोव में wick-based या प्रेशर-रेगुलेटेड सिस्टम होता है जिससे लौ स्थिर रहती है और खाना जल्दी पकता है.कितना सुरक्षित है यह स्टोव?एथेनॉल स्टोव को पुराने जमाने के लकड़ी या केरोसिन स्टोव की तुलना में ज्यादा सुरक्षित माना जाता है. इसमें धुआं बहुत कम निकलता है जिससे घर के अंदर प्रदूषण नहीं फैलता. साथ ही इसमें गैस लीक या सिलेंडर फटने जैसा खतरा भी नहीं होता. हालांकि, एथेनॉल एक ज्वलनशील तरल है इसलिए इसे सावधानी से इस्तेमाल करना जरूरी है. सही तरीके से स्टोव का इस्तेमाल करने पर यह काफी सुरक्षित रहता है.खाना बनाना कितना सस्ता पड़ता है?अब सबसे बड़ा सवाल क्या यह वास्तव में सस्ता है? एथेनॉल स्टोव पर खाना बनाना कई मामलों में एलपीजी से किफायती साबित हो सकता है. एथेनॉल की कीमत कई जगहों पर गैस से कम होती है. इसकी खपत नियंत्रित होती है, जिससे ईंधन की बचत होती है. छोटे परिवारों के लिए यह ज्यादा किफायती विकल्प बन सकता है.हालांकि, इसकी लागत इस बात पर भी निर्भर करती है कि आपके क्षेत्र में एथेनॉल कितनी कीमत पर उपलब्ध है.पर्यावरण के लिए कितना बेहतर?एथेनॉल एक बायोफ्यूल है इसलिए यह जलने पर कम कार्बन उत्सर्जन करता है. लकड़ी या कोयले की तुलना में यह पर्यावरण को कम नुकसान पहुंचाता है. साथ ही इससे जंगलों पर दबाव भी कम होता है क्योंकि लकड़ी की जरूरत नहीं पड़ती.क्या आपको एथेनॉल स्टोव लेना चाहिए?अगर आप सस्ता, साफ और सुरक्षित कुकिंग ऑप्शन चाहते हैं तो एथेनॉल स्टोव एक अच्छा ऑप्शन हो सकता है. खासकर उन जगहों पर जहां गैस की सप्लाई नियमित नहीं है वहां यह काफी उपयोगी साबित होता है.यह भी पढ़ें:समंदर की केबल से एक देश से दूसरे देश जाता है इंटरनेट, कभी सोचा है यह बनता कहां है?