Male Birth Control Pill: वैज्ञानिकों ने लड़कों के लिए बनाई गर्भनिरोधक गोली, स्पर्म प्रोडक्शन पर ही लगा देती है ब्रेक

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How Male Birth Control Pill Works: दशकों से गर्भनिरोध की जिम्मेदारी ज्यादातर महिलाओं पर ही रही है, जबकि पुरुषों के पास सीमित विकल्प कंडोम या नसबंदी ही मौजूद थे. लेकिन अब विज्ञान की दुनिया से आई एक नई खोज इस सोच को बदल सकती है. हाल ही में पब्लिश एक स्टडी में साइंटिस्ट ने पुरुषों के लिए ऐसी गर्भनिरोधक दवा की दिशा में बड़ी सफलता हासिल की है, जो बिना हार्मोन के असर के काम कर सकती है और जिसका प्रभाव अस्थायी हो सकता है. क्या है यह नई खोज?अमेरिका की कॉर्नेल यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने अपनी रिसर्च में बताया कि शरीर में एक खास प्रक्रिया को रोककर स्पर्म बनने की प्रक्रिया को अस्थायी रूप से बंद किया जा सकता है. सबसे खास बात यह है कि इससे शरीर को कोई स्थायी नुकसान नहीं होता और दवा बंद करने पर फिर से सामान्य स्थिति लौट सकती है.इस रिसर्च में साइंटिस्ट ने मियोसिस नाम की एक अहम जैविक प्रक्रिया पर ध्यान दिया, जो स्पर्म बनने के लिए जरूरी होती है. प्रयोग के दौरान एक खास कंपाउंड का इस्तेमाल कर इस प्रक्रिया को चूहों में अस्थायी रूप से रोक दिया गया. इसका नतीजा यह हुआ कि स्पर्म बनना बंद हो गया, लेकिन जब दवा बंद की गई, तो उनकी प्रजनन क्षमता वापस लौट आई और वे स्वस्थ संतानों को जन्म देने में सक्षम रहे. इसे भी पढ़ें - Hot Water Benefits: वजन कम करने के लिए सुबह-सुबह आप भी पीते हैं गर्म पानी, क्या सच में काम करता है यह हैक?क्यों अहम है यह खोज?यह खोज इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि अब तक पुरुष गर्भनिरोधक तरीकों में कई दिक्कतें सामने आती रही हैं. हार्मोन आधारित तरीकों से मूड में बदलाव और यौन इच्छा में कमी जैसी समस्याएं होती हैं, जबकि नसबंदी स्थायी समाधान है और इसे आसानी से वापस नहीं किया जा सकता. ऐसे में बिना हार्मोन वाला और अस्थायी तरीका एक बड़ी उम्मीद बनकर सामने आया है.कैसे काम करती है यह तकनीक?यह नई तकनीक स्पर्म के विकास के एक खास चरण को रोककर काम करती है. जब यह प्रक्रिया बाधित होती है, तो स्पर्म सही तरीके से विकसित नहीं हो पाते और प्रजनन क्षमता कुछ समय के लिए रुक जाती है. हालांकि, जैसे ही दवा का असर खत्म होता है, शरीर दोबारा सामान्य रूप से काम करने लगता है. हालांकि साइंटिस्ट ने यह भी साफ किया है कि अभी इस्तेमाल किया गया कंपाउंड इंसानों के लिए पूरी तरह सुरक्षित नहीं माना जा सकता. इसमें कुछ संभावित दुष्प्रभाव हो सकते हैं, इसलिए फिलहाल इसे एक शुरुआती कदम के तौर पर देखा जा रहा है.  इसका मकसद ऐसे सुरक्षित विकल्प विकसित करना है, जो इसी प्रक्रिया को निशाना बनाकर काम कर सकें.यह भी पढ़ें -  ग्रेड-1 फैटी लिवर में फायदेमंद हो सकता है मेथी का पानी, जानिए इसके चौंकाने वाले फायदेDisclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.