ABP Live की भविष्यवाणी फिर हुई सच: फेल हुई 21 घंटे की US-Iran वार्ता, अब 18 अप्रैल से शुरू होगा महा-टकराव का नया चरण!

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Geopolitics Astrology: पूरी दुनिया शांति की आस लगाए बैठी थी, लेकिन ABP Live ने पहले ही अपनी ज्योतिषीय गणना में 'बड़े धोखे' का संकेत दे दिया था.इस्लामाबाद में 21 घंटे चली अमेरिका-ईरान की मैराथन बैठक बिना किसी नतीजे के खत्म हो गई है, जैसा कि हमारे विश्लेषण में पहले ही बताया गया था.यहां पढ़ें वो भविष्यवाणी- US Iran Talks in Islamabad: क्या बेनतीजा रहेगी इस्लामाबाद वार्ता? 18-24 अप्रैल के बीच फिर भड़क सकती है चिंगारी!लेकिन खतरा अभी टला नहीं है, मेदिनी ज्योतिष के अनुसार, 11 अप्रैल को चंद्रमा का राशि परिवर्तन तो बस एक शुरुआत थी, असली 'रणनीतिक जाल' अब 18 से 24 अप्रैल के बीच खुलेगा.आखिर क्यों फेल हुई यह बातचीत और आने वाले दिनों में क्यों बढ़ सकती है आपकी जेब पर महंगाई की मार? पढ़िए यह विशेष विश्लेषण.11 अप्रैल 2026 की इस्लामाबाद वार्ता को दुनिया एक बड़ी उम्मीद की तरह देख रही थी. अंतरराष्ट्रीय मीडिया से लेकर सोशल मीडिया के गलियारों तक, हर जगह बस एक ही चर्चा थी कि शायद अब दशकों पुराना ईरान-अमेरिका तनाव खत्म हो जाएगा.लेकिन सच यह है कि जब पूरी दुनिया उम्मीदों के दीये जला रही थी, तब ज्योतिषीय गणना कुछ और ही कहानी बयां कर रही थी. 10 अप्रैल की शाम को जब ग्रहों की स्थिति और विशेषकर चंद्रमा के गोचर का बारीकी से अध्ययन किया गया, तभी यह साफ हो गया था कि यह वार्ता सफल नहीं होने वाली.ABP Live पर हमने पहले ही इस वार्ता को लेकर रणनीतिक जाल की आशंका जताई थी. आज जब वार्ता बिना किसी ठोस नतीजे के समाप्त हो गई है, तो यह स्पष्ट है कि सितारों की चाल ने एक बार फिर कूटनीति के भविष्य को पहले ही भांप लिया था. यह केवल एक विफल बैठक नहीं है, बल्कि एक ऐसे मनोवैज्ञानिक और सामरिक युद्ध की शुरुआत है, जिसका असर आने वाले कई महीनों तक वैश्विक पटल पर दिखने वाला है.21 घंटों का गणित: क्यों बेअसर रही बातचीत?इस वार्ता की गहराई को समझने के लिए हमें उन 21 घंटों के घटनाक्रम को देखना होगा. यूनाइटेड स्टेट्स और ईरान के प्रतिनिधियों के बीच इस्लामाबाद में बंद कमरों में घंटों चर्चा हुई. बाहर बैठी दुनिया को लग रहा था कि शायद कोई बीच का रास्ता निकल आएगा, लेकिन मेदिनी ज्योतिष के सिद्धांतों के अनुसार, यह समय Hard Bargain Phase यानी कठोर सौदेबाजी का दौर था.ज्योतिष शास्त्र में कुछ योग ऐसे होते हैं जहां पक्षकार बातचीत की मेज पर तो बैठते हैं, लेकिन उनके मन में समझौते की कोई भावना नहीं होती. 10 अप्रैल की शाम तक जब चंद्रमा धनु राशि में था, तब तक माहौल में एक बनावटी मीठी और वैचारिक आदान-प्रदान की गुंजाइश दिख रही थी.धनु राशि अग्नि तत्व की होने के बावजूद ज्ञान और विस्तार की राशि है, जिसके कारण शुरुआती दौर में शब्दों का चयन नरम रखा गया था. ऐसा लग रहा था कि दोनों पक्ष एक-दूसरे की शर्तों को सुनने और समझने के लिए तैयार हैं, लेकिन यह केवल एक रणनीतिक तैयारी थी, समाधान की दिशा में बढ़ता कदम नहीं.चंद्रमा का राशि परिवर्तन और बदल गया पूरा माहौलजैसे ही 11 अप्रैल की सुबह हुई और चंद्रमा ने मकर राशि में प्रवेश किया, वार्ता की पूरी दिशा ही बदल गई. मकर राशि शनि द्वारा शासित है, जो अपनी प्रकृति में कठोर, व्यावहारिक, अनुशासित और बिना किसी समझौते के परिणाम चाहने वाली राशि है.ज्योतिष का एक बुनियादी सिद्धांत कहता है कि जब चंद्रमा राशि परिवर्तन के करीब होता है, तो स्थितियां अत्यधिक अस्थिर हो जाती हैं. यही कारण रहा कि 11 अप्रैल 2026 को बातचीत का स्वर अचानक बदल गया.जहां पहले लचीलापन दिख रहा था, वहां अब ऐसी शर्तें रख दी गईं जिन्हें मानना किसी भी पक्ष के लिए संभव नहीं था. ईरान ने अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय प्रभाव को लेकर कड़ा रुख अख्तियार किया, तो वहीं अमेरिका ने कड़े प्रतिबंधों और निरीक्षण की शर्तों से पीछे हटने से साफ इनकार कर दिया. मकर राशि के प्रभाव ने वार्ताकारों को सब कुछ या कुछ नहीं की स्थिति में ला खड़ा किया, जिसके कारण 21 घंटे बाद नतीजा शून्य रहा.हमारी पिछली भविष्यवाणियों को देखने के लिए यहां क्लिक करें: भविष्यवाणी 2026अब आरंभ होगा प्रचंड!इस टकराव को केवल दो शक्तिशाली देशों की जिद के तौर पर देखना गलत होगा. असल में यह दो अलग-अलग रणनीतिक शैलियों का सीधा टकराव है. ज्योतिषीय दृष्टिकोण से देखें तो ईरान की कार्यशैली राहु और शनि से प्रभावित है, जो उसे एक ऐसी कूटनीति अपनाने पर मजबूर करती है जो सीधी नहीं होती.ईरान समय लेकर और अप्रत्याशित तरीके से दबाव बनाकर अपने हितों की रक्षा करता है. दूसरी ओर, अमेरिका की कार्यशैली मंगल और सूर्य के प्रभाव वाली है, जहां नियम और दबाव दोनों स्पष्ट होते हैं.वर्तमान स्थिति को ज्योतिष की भाषा में छद्म शांति कहा जा सकता है. जमीन पर तनाव कम नहीं हुआ है, बल्कि उसने अपना रूप बदल लिया है. बातचीत के विफल होने का मतलब यह नहीं है कि दोनों पक्ष तुरंत युद्ध के मैदान में उतर जाएंगे, बल्कि अब एक 'नियंत्रित तनाव' का दौर शुरू होगा. ग्रहों की स्थिति संकेत दे रही है कि विश्वास का जो संकट पैदा हुआ है, वह इतनी जल्दी खत्म नहीं होगा.सावधान! 18 से 24 अप्रैल का संकटआने वाले दिनों में 18 से 24 अप्रैल का समय पूरी दुनिया के लिए अत्यंत संवेदनशील होने वाला है. इस कालखंड में ग्रहों की युति कुछ ऐसी बन रही है जो किसी भी छोटी सी चिंगारी को बड़ी आग में बदल सकती है. यह तनाव अब केवल मेज पर नहीं रहेगा, बल्कि इसकी गूँज समुद्री रास्तों, सीमावर्ती क्षेत्रों और साइबर स्पेस में भी सुनाई दे सकती है. ग्रहों की चाल यह साफ कर रही है कि हम अभी एक लंबे और कठिन दौर से गुजरने वाले हैं.आप पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगाशनि, राहु या अन्य ग्रह सिर्फ इन देशों को ही प्रभावित नहीं कर रहे हैं, ये आपकी जेब और डैली लाइफस्टाइल को भी बुरी तरह से प्रभावित करने जा रहे हैं. इस अंतरराष्ट्रीय अस्थिरता का सीधा असर आपकी और हमारी रोजमर्रा की जिंदगी पर भी पड़ेगा.मेदिनी ज्योतिष के अनुसार, जब भी दो बड़े ध्रुवों के बीच टकराव बढ़ता है, तो उसका असर वैश्विक बाजारों पर पड़ता है. तेल की कीमतों में अप्रत्याशित उछाल, महंगाई में बढ़ोतरी और शेयर बाजार में भारी उतार-चढ़ाव की संभावना है. निवेशकों के बीच अनिश्चितता का माहौल पैदा होगा, जिससे आर्थिक विकास की गति धीमी पड़ सकती है.अगली टक्कर की तैयारीअंत में, यह स्पष्ट है कि इस्लामाबाद वार्ता किसी अंत की शुरुआत नहीं, बल्कि एक नए चरण की शुरुआत है. दुनिया इसे समझौते की नाकाम कोशिश मान सकती है, लेकिन सितारों के संकेत कहते हैं कि यह खामोशी अगली बड़ी टक्कर की तैयारी है.शांति के नाम पर जो समय लिया गया था, उसका उपयोग अब दोनों पक्ष अपनी-अपनी अगली सामरिक चालें चलने के लिए करेंगे. यह रणनीतिक विराम का समय है, जहां हथियारों से ज्यादा दिमाग और कूटनीतिक जाल का इस्तेमाल होगा. यह शांति नहीं है, यह बस अगली टक्कर से पहले की वह भयावह खामोशी है जिसे वक्त रहते समझना जरूरी है.यह भी पढ़ें- Akshaya Tritiya 2026: अक्षय तृतीया पर 100 साल बाद 'अक्षय योग', इन राशियों पर बरसेगी मां लक्ष्मी की कृपाDisclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.