Baglamukhi Jayanti 2026: बगलामुखी जयंती अप्रैल में कब ? शत्रुओं पर जीत दिलाती हैं देवी, जानें इनकी पूजा कैसे करें

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Baglamukhi Jayanti 2026: 10 महाविद्याओं में मां बगलामुखी अष्‍टम (आठवीं) महाविद्या है. वैशाख शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को बगलामुखी जयंती मनाई जाती है. इस साल बगलामुखी जयंती 25 अप्रैल 2026 शुक्रवार को है. कहा जाता है यदि सारे ब्रह्मांड की शक्तियां मिल भी जाए तो वह मां बगलामुखी का मुकाबला नहीं कर सकती हैं.  देवी को बगलामुखी, पीताम्बरा, बगला, वल्गामुखी, वगलामुखी, ब्रह्मास्त्र विद्या आदि नामों से भी जाना जाता है. मां बगलामुखी वाणी, वाक्पटुता और नियंत्रण की शक्ति का प्रतिनिधित्व करती हैं. विशेषतौर पर तांत्रिक साधना के लिए मां बगलामुखी की पूजा प्रसिद्ध है.मां बगलामुखी 2026 पूजा मुहूर्तसुबह पूजा मुहूर्त - सुबह 5.47 - सुबह 10.41तांत्रिक पूजा रात्रि काल में होती है, लेकिन इसे गुरु या किसी जानकार के मार्गदर्शन में ही करना चाहिए नहीं तो उसका विपरीत असर साधक पर ही होता है.मां बगलामुखी की पूजा के लाभशत्रुओं पर विजयकोर्ट-केस में जीतवाद-विवाद में सफलतावाणी में वाक्पटुतादरिद्रता के नाशबाधाओं से मुक्ति के लिए मां बगलामुखी की पूजा अचूक मानी जाती है.मां बगलामुखी की पूजा विधिमां बगलामुखी की पूजा में पीले रंग का अधिक इस्तेमाल करें. गृहस्थ जीवन वाले माता की सामान्य पूजा करें.सुबह स्नान के बाद पीले रंग के वस्त्र पहनें.माता को पीले फूल, हल्दी, अक्षत, सिंदूर, श्रृंगार की सामग्री अर्पित करें.केला या हलवे का भोग लगाएं.ॐ ह्लीं बगलामुख्यै नमः मंत्र का जाप करें. आरती कर अपनी मनोकामना कहें.मां बगलामुखी से पहले मृत्युंजय भैरव पूजनशक्ति की उपासना में भैरव पूजन का विशेष महत्व होता है. मां बगलामुखी के भैरव मृत्युंजय भैरव हैं. भैरव पूजन के लिए दशांश मृत्युंय भैरव मंत्र हौं जूं स: का जाप अवश्य करें.मां बगलामुखी पूजा मंत्रॐ ह्लीं बगलामुखि सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय जिव्हां कीलय बुद्धिं विनाशय ह्लीं ॐ स्वाहा।मां बगलामुखी कथाएक बार सतयुग में महाविनाश उत्पन्न करने वाला ब्रह्मांडीय तूफान उत्पन्न हुआ, जिससे संपूर्ण विश्व नष्ट होने लगा इससे चारों ओर हाहाकार मच गया। भगवान विष्णु जी चिंतित हो गए।इस समस्या का कोई हल न पा कर वह भगवान शिव को स्मरण करने लगे, तब भगवान शिव ने कहा: शक्ति रूप इस प्रलय को रोक सकती हैं.  इसके बाद भगवान विष्णु ने कठिन तपस्या की थी, तब माता बगलामुखी प्रकट हुई थीं।कहां हैं मां बगलामुखी का मंदिरभारत में मां बगलामुखी के तीन मुख्य सिद्धपीठ हैं- हिमाचल प्रदेश (बनखंडी), नलखेड़ा (मध्य प्रदेश), और दतिया (मध्यप्रदेश)Char Dham Yatra 2026: 19 अप्रैल से शुरू होगी चार धाम यात्रा, बद्रीनाथ-केदारनाथ के कपाट कब खुलेंगे जान लेंDisclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.