मुठभेड़ में बुझ गई बदले की आग... खामोश जंगलों में गोलियों की तड़तड़ाहट में खत्म हो गई माओवादी कमांडर की प्रेम कहानी

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कांकेर के माचपल्ली-आरामझोरा-हिडूर के घने, नम और खामोश जंगलों में गोलियों ने एक ऐसी प्रेम कहानी का अंतिम अध्याय लिख दिया, जो कभी इन्हीं जंगलों में जन्मी थी।