कांकेर के माचपल्ली-आरामझोरा-हिडूर के घने, नम और खामोश जंगलों में गोलियों ने एक ऐसी प्रेम कहानी का अंतिम अध्याय लिख दिया, जो कभी इन्हीं जंगलों में जन्मी थी।