(जनवादी लेखक संघ, दिल्ली के 10 वें राज्य सम्मेलन (4 अप्रैल 2026) में प्रस्तुत वक्तव्य का संशोधित एवं विस्तारित रूप, सम्मेलन के विचार सत्र का फोकस था : हमारा समय और लेखक की भूमिका) प्रस्तावना हम एक नाजु़क वक्त़ से गुजर रहे हैं। कोई भी प्रबुद्ध व्यक्ति – जो न्याय, अमन और बराबरी की चाहत रखता हो, समूची मानवता को तरक्की के रास्ते … Continue reading ‘सत्य को बयां करने के रास्ते की मुश्किलों के बारे में’ क्या लेखक सचेत और सक्रिय हैं? →