Aspirin Cancer Prevention: क्या कैंसर के खतरे को कम कर सकती है एस्पिरिन? जान लें इसके पीछे की वजह

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Can Daily Aspirin Prevent Cancer Risk: क्या एक साधारण दर्द की गोली कैंसर के खतरे को कम कर सकती है? यह सवाल सुनने में थोड़ा अजीब लग सकता है, लेकिन हाल के रिसर्च इस ओर इशारा कर रहे हैं कि एस्पिरिन सिर्फ दर्द से राहत देने तक सीमित नहीं है. कुछ मामलों में यह कैंसर के खतरे को कम करने में भी भूमिका निभा सकती है. चलिए आपको बताते हैं कि रिसर्च में क्या निकला.क्या निकला रिसर्च में इस दिशा में सबसे अहम रिसर्च जॉन बर्न्स  के नेतृत्व में हुई, जिन्होंने लिंच सिंड्रोम वाले मरीजों पर एक बड़ा क्लिनिकल ट्रायल किया. यह एक जेनेटिक स्थिति है, जिसमें लोगों में कोलोरेक्टल कैंसर का खतरा काफी ज्यादा होता है. इस स्टडी में पाया गया कि जो लोग रोज़ाना एस्पिरिन लेते रहे, उनमें कैंसर का खतरा लगभग आधा हो गया. करीब 10 साल तक चले इस ट्रायल में 600 मिलीग्राम एस्पिरिन की डोज़ दी गई और नतीजे इतने मजबूत थे कि कई देशों में हेल्थ गाइडलाइंस तक बदल दी गईं. इसके बाद कम डोज यानी 75 से 100 मिलीग्राम पर भी स्टडी हुआ, जिसमें शुरुआती संकेत मिले कि कम मात्रा भी उतनी ही असरदार हो सकती है.मरीजों पर किया गया ट्रायलइसी तरह स्वीडन के करोलिंस्का इंस्टीट्यूट में एना मार्टलिंग के नेतृत्व में 2,980 मरीजों पर एक और बड़ा रैंडमाइज्ड कंट्रोल्ड ट्रायल किया गया. इसमें पाया गया कि जिन लोगों ने सर्जरी के बाद रोजाना एस्पिरिन ली, उनमें कैंसर के दोबारा होने का खतरा आधे से भी कम हो गया. यह स्टडी 2025 में पब्लिश हुई और इसके बाद वहां की मेडिकल प्रैक्टिस में भी बदलाव देखने को मिला. इसे भी पढ़ें- Painkiller Side Effects: क्या पेन किलर से सच में खराब हो जाते हैं ऑर्गन, जानें किस मात्रा में सही रहता है इनका सेवन?एस्पिरिन कैसे काम करती हैअब सवाल यह उठता है कि आखिर एस्पिरिन ऐसा कैसे करती है. बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन की ऑन्कोलॉजी एक्सपर्ट रुथ लैंगली के अनुसार, यह दवा शरीर में उन प्रक्रियाओं को प्रभावित करती है जो कैंसर सेल्स के फैलाव से जुड़ी होती हैं. वहीं, केम्ब्रिज यूनिवर्सिटी की रिसर्च बताती है कि एस्पिरिन खून के थक्के बनने से जुड़े तत्वों को कम करके कैंसर सेल्स को इम्यून सिस्टम के सामने उजागर कर सकती है, जिससे शरीर उन्हें पहचानकर नष्ट कर सके. आपको किस बात का ध्यान रखना चाहिएहालांकि, यह समझना जरूरी है कि एस्पिरिन कोई जादुई इलाज नहीं है. इसके साइड इफेक्ट भी हो सकते हैं, जैसे पेट में जलन, अल्सर या इंटरनल ब्लीडिंग इसलिए डॉक्टर की सलाह के बिना इसे लेना खतरनाक हो सकता है.  रिसर्च यह जरूर दिखाती है कि एस्पिरिन कैंसर के खतरे को कम करने में मदद कर सकती है, लेकिन यह हर व्यक्ति के लिए एक जैसा असर नहीं दिखाती. इसलिए इसे अपनाने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना ही सबसे सुरक्षित तरीका है.इसे भी पढ़ें- Metabolic Diseases In India: भारत में तेजी से फैल रही हैं मेटाबॉलिक बीमारियां, कहीं आप भी तो नहीं इसके शिकार?Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.