आज का शब्द: भ्रंश और सुमित्रानंदन पंत की कविता- तुम वीतराग, जड़ पुराचीन!

Wait 5 sec.

आज का शब्द: भ्रंश और सुमित्रानंदन पंत की कविता- तुम वीतराग, जड़ पुराचीन!