दूल्हा खुद असमंजस में था कि वह एक साथ पत्नी की डोली और पिता के शव को कैसे लेकर जाए। लोगों ने हिम्मत बंधाई, जिसके बाद शव को जयसिंहनगर के ग्राम गजनी ले जाया गया।