…… ‘समाजवादियों ने हिन्दू राष्ट्र को किस तरह मुमकिन बनाया ?’ ..समाजवादी धारा की यह परिणति भारत की वाम शक्तियों के सामने भी कुछ सवाल निश्चित ही खड़े करती है। अगर 60 के दशक में समाजवादी धारा के अग्रणी कांग्रेस को शिकस्त देने के लिए ‘शैतान के साथ भी हाथ मिलाने को तैयार होने’ की बात रख रहे थे, पहले … Continue reading सत्य के अन्वेषी और ‘अंधेरे की आदत’ वाला समाज →