प्रेग्नेंसी के टाइममलेरिया तो हो जाएं सावधान, बन सकता है प्रीमैच्योर डिलीवरी की वजह 

Wait 5 sec.

Malaria In Pregnancy: गर्मी और बरसात का मौसम आते ही मच्छरों का खतरा तेजी से बढ़ जाता है और इसी के साथ मलेरिया जैसी बीमारी का डर भी सताने लगता है. ऐसे में मां के लिए पेट में पल रहे बच्चे का ख्याल रखना एक बहुत ही अनोखा और नाजुक एहसास होता है. इस दौरान हर मां चाहती है कि वे अपने बच्चे को हर खतरे से बचाये जिसके लिए वे पूरी कोशिश करती है. लेकिन क्या आपको पता है कि एक छोटा सा मच्छर भी इस सुरक्षा के लिए बहुत बड़ा खतरा बन सकता है?आम लोगों के लिए यह बीमारी जितनी खतरनाक है, प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए यह उससे भी कहीं ज्यादा गंभीर साबित हो सकती है. गर्भावस्था के दौरान शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता थोड़ी कमजोर हो जाती है, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है. वही अगर इसी समय उनको मलेरिया हो जाए तो यह मां और बच्चे दोनों के लिए नुकसानदेह हो सकता है. यही कारण है कि डॉक्टर इस दौरान विशेष सावधानी बरतने की सलाह देते हैं.प्रीमैच्योर डिलीवरी का बढ़ सकता है खतराप्रेग्नेंसी के दौरान मलेरिया होने पर सबसे बड़ा खतरा प्रीमैच्योर डिलीवरी यानी समय से पहले बच्चे के जन्म का होता है. विशेषज्ञों के अनुसार, प्रेग्नेंसी में मलेरिया को कभी भी एक सामान्य बुखार समझकर अनदेखा नहीं करना चाहिए. यह बीमारी केवल होने वाली मां के स्वास्थ्य को ही नुकसान नहीं पहुंचाती है, बल्कि इसका सीधा और बुरा असर अजन्मे बच्चे के विकास पर भी पड़ता है. मलेरिया का परजीवी शरीर में खून को प्रभावित करता है, जिससे प्लेसेंटा पर भी असर पड़ सकता है. इससे बच्चे को सही मात्रा में पोषण और ऑक्सीजन नहीं मिल पाता. कई मामलों में यह भी देखा गया है कि इससे बच्चे का वजन कम हो जाता है या फिर समय से पहले डिलीवरी हो जाती है. कुछ गंभीर स्थितियों में गर्भपात का खतरा भी बढ़ जाता है, इसलिए इस बीमारी को हल्के में लेना बिल्कुल भी सही नहीं है.यह भी पढ़ेंः सिर्फ त्वचा ही नहीं, स्कैल्प भी हो सकता है सनबर्न का शिकार, एक्सपर्ट बोले- इसे न करें नजरअंदाजमां और बच्चे दोनों पर पड़ता है असरमलेरिया केवल बच्चे के लिए ही नहीं, बल्कि मां की सेहत के लिए भी खतरनाक होता है. ऐसे में गर्भवती महिलाओं को अपने शरीर में नजर आने वाले लक्षणों को कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए. जैसे तेज बुखार, कमजोरी, सिर दर्द और शरीर में दर्द जैसी समस्याएं हो सकती हैं. अगर समय पर इलाज न मिले, तो यह एनीमिया का कारण भी बन सकता है, जिससे शरीर में खून की कमी हो जाती है. मां की खराब सेहत का सीधा असर बच्चे के विकास पर पड़ता है. ऐसे में जरूरी है कि लक्षण दिखते ही तुरंत डॉक्टर से संपर्क किया जाए और सही इलाज शुरू किया जाए.बचाव ही सबसे बेहतर उपायप्रेग्नेंसी के दौरान मलेरिया से बचाव करना सबसे जरूरी होता है. इसके लिए मच्छरों से दूर रहना बेहद जरूरी है. इसके लिए आपके अपनी दिनचर्या में कुछ आसान कदम शामिल करना होगा, जैसे घर के आसपास पानी जमा न होने दें, मच्छरदानी का इस्तेमाल करें और पूरे कपड़े पहनें. डॉक्टर की सलाह के बिना कोई भी दवा न लें. अगर बुखार या मलेरिया के लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत जांच कराएं. डॉक्टर का मानना है कि इस बीमारी से डरने के बजाय सतर्क रहने की जरूरत है. समय पर इलाज और सही देखभाल से इस बीमारी के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है. मां और बच्चे दोनों की सुरक्षा के लिए सावधानी और जागरूकता बहुत जरूरी है.Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.यह भी पढ़ेंः मां बनने की राह में 'स्ट्रेस' बड़ा रोड़ा... तनाव-एंग्जायटी से घट रहा IVF का सक्सेस रेट