बिश्नोई समाज आज भी अपनी उसी पुरानी आन-बान और शान के साथ रेगिस्तान के प्रहरी के रूप में खड़ा है, जहां आस्था का रंग काले हिरण की सुरक्षा से और भी गहरा हो जाता है।