कोर्ट ने फैसले में कहा कि मां बच्चे का पहला घर, पहली शिक्षिका और पहली संरक्षक होती है। यह केवल आधुनिक कानूनी अवधारणा नहीं, बल्कि भारतीय सभ्यता का मूल मूल्य है।