दवाओं के मामले में 'प्रिस्क्रिप्शन' के साथ छेड़छाड़ करना केवल लापरवाही नहीं, बल्कि एक आपराधिक कृत्य है। यह मामला मेडिकल संचालकों के लिए एक बड़ी चेतावनी है कि वे डॉक्टर द्वारा लिखी गई दवाओं को अपनी मर्जी से न बदलें।