Rin Mochan Mangal Stotram: मंगलवार का दिन भगवान हनुमान (Hanuman Ji) की पूजा का सबसे उत्तम दिन माना जाता है. हनुमान जी की अराधना से समस्त परेशानियों से छुटकारा मिलता है. आज के समय में लोगों के बीच जो सबसे आम समस्या है, वह है ‘कर्ज’. आम व्यक्ति होम लोन, पर्सनल लोन और क्रेडिट कार्ड की EMI के जरिए कई तरह के आर्थिक दबाव में फंसा हुआ है.कर्ज या किस्त से ना सिर्फ जीवन तनावपूर्ण हो जाता है, बल्कि इससे आर्थिक परेशानी और मानसिक अशांति भी बढ़ती है. लेकिन ज्योतिष और धार्मिक उपायों में विश्वास रखने वाले लोगों के लिए ऋण मंगल मोचन स्तोत्र कर्ज मुक्ति के लिए एक प्रभावी उपाय माना जाता है, खासकर मंगलवार के दिन इसका पाठ करना फलदायी हो सकता है.ऋण मंगल मोचन स्तोत्र क्या हैऋण मंगल मोचन स्तोत्र हनुमानजी और मंगल ग्रह को समर्पित एक स्तोत्र है. मान्यता है कि, इसका पाठ करने से आर्थिक परेशानियों और कर्ज से शीघ्र मुक्ति मिल सकती है. साथ ही यह स्तोत्र नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है. यदि आप मानसिक या आर्थिक परेशानियों से जूझ रहे हैं तो मंगलवार के दिन ऋण मंगल मोचन स्तोत्र का पाठ कर सकते हैं.Pradosh Vrat 2026: वैशाख महीने के आखिरी प्रदोष व्रत पर दुर्लभ संयोग, शिव कृपा पाने के लिए करें ये कामऋण मंगल मोचन स्तोत्र की विधि और लाभआप प्रतिदिन या मंगलवार को ऋण मोचन मंगल स्तोत्र का पाठ कर सकते हैं.स्नान के बाद लाल रंग का वस्त्र पहनें और लाल आसन पर बैठकर हनुमान जी की पूजा करें. इसके बाद ऋण मंगल मोचन स्तोत्र का पाठ करे.ऋण मोचन मंगल स्तोत्र के पाठ से हनुमान जी की कृपा मिलती है और कुंडली में मंगल के अशुभ प्रभाव भी कम होते हैं.माना जाता है कि, कुंडली में मंगल अशुभ स्थिति में हो तो कर्ज और मानसिक तनाव बढ़ता है. ऐसे में मंगलवार के दिन इसका पाठ किया जा सकता है.ऋण मंगल मोचन स्तोत्र का पाठ कम से कम 11 बार करना लाभकारी माना जाता है. अगर संभव हो तो 21 या 40 दिनों तक लगातार भी यह पाठ कर सकते हैं.॥ऋणमोचन मंगल स्तोत्र॥मङ्गलो भूमिपुत्रश्च ऋणहर्ता धनप्रदः।स्थिरासनो महाकयः सर्वकर्मविरोधकः ॥1॥लोहितो लोहिताक्षश्च सामगानां कृपाकरः।धरात्मजः कुजो भौमो भूतिदो भूमिनन्दनः॥2॥अङ्गारको यमश्चैव सर्वरोगापहारकः।व्रुष्टेः कर्ताऽपहर्ता च सर्वकामफलप्रदः॥3॥एतानि कुजनामनि नित्यं यः श्रद्धया पठेत्।ऋणं न जायते तस्य धनं शीघ्रमवाप्नुयात्॥4॥धरणीगर्भसम्भूतं विद्युत्कान्तिसमप्रभम्।कुमारं शक्तिहस्तं च मङ्गलं प्रणमाम्यहम्॥5॥स्तोत्रमङ्गारकस्यैतत्पठनीयं सदा नृभिः।न तेषां भौमजा पीडा स्वल्पाऽपि भवति क्वचित्॥6॥अङ्गारक महाभाग भगवन्भक्तवत्सल।त्वां नमामि ममाशेषमृणमाशु विनाशय॥7॥ऋणरोगादिदारिद्रयं ये चान्ये ह्यपमृत्यवः।भयक्लेशमनस्तापा नश्यन्तु मम सर्वदा॥ 8 ||अतिवक्त्र दुरारार्ध्य भोगमुक्त जितात्मनः।तुष्टो ददासि साम्राज्यं रुश्टो हरसि तत्ख्शणात्॥9॥विरिंचिशक्रविष्णूनां मनुष्याणां तु का कथा।तेन त्वं सर्वसत्त्वेन ग्रहराजो महाबलः॥10॥पुत्रान्देहि धनं देहि त्वामस्मि शरणं गतः।ऋणदारिद्रयदुःखेन शत्रूणां च भयात्ततः॥11॥एभिर्द्वादशभिः श्लोकैर्यः स्तौति च धरासुतम्।महतिं श्रियमाप्नोति ह्यपरो धनदो युवा॥12॥|| इति श्री ऋणमोचक मङ्गलस्तोत्रम् सम्पूर्णम् ||ये भी पढ़ें: Pradosh Vrat 2026 Date: भौम प्रदोष व्रत कब है 28 या 29 अप्रैल, जानिए सही तिथि और पूजा का मुहूर्तDisclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.