फिजिकल हेल्थ- नींद में सुनाई देती है धमाके की आवाज:हो सकता है ‘एक्सप्लोडिंग हेड सिंड्रोम,’ डॉक्टर से समझें इसका कारण और रिस्क फैक्टर्स

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कभी-कभी सोते वक्त या नींद से ठीक पहले अचानक तेज धमाके जैसी आवाज सुनाई देती है। पल भर के लिए ऐसा लगता है, जैसे कोई बम फट गया हो, दरवाजा जोर से बंद हुआ हो या बिजली गिरी हो। डर से नींद टूट जाती है और हार्ट बीट बढ़ जाती है। यह एक ‘स्लीपिंग कंडीशन’ है, जिसे ‘एक्सप्लोडिंग हेड सिंड्रोम’ कहते हैं। इसमें सुनाई देने वाली आवाज असली नहीं होती, बल्कि दिमागी भ्रम होता है। इससे घबराहट और नींद टूटने की समस्या हो सकती है। इसलिए ‘फिजिकल हेल्थ’ में आज एक्सप्लोडिंग हेड सिंड्रोम के बारे में बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- सवाल- नींद में अचानक तेज धमाके जैसी आवाज क्यों सुनाई देती है? जवाब- पल्मोनोलॉजिस्ट डॉक्टर पीयूष गोयल बताते हैं कि सोने और जागने के बीच ब्रेन का कंट्रोल सिस्टम कुछ सेकेंड के लिए इंबैलेंस हो जाता है। उसी समय ब्रेन ऐसे सिग्नल बनाता है, जिससे तेज आवाज का अहसास होता है, जबकि असल में कोई आवाज नहीं होती। सवाल- क्या यह कोई बीमारी है या ब्रेन का नॉर्मल रिएक्शन है? जवाब- डॉक्टर पीयूष कहते हैं कि यह कोई बीमारी नहीं है। यह दिमाग का असामान्य, लेकिन हार्मलेस रिएक्शन है। सवाल- क्या इससे ब्रेन या शरीर को कोई नुकसान होता है? जवाब- नहीं, इससे कोई नुकसान नहीं होता। सवाल- क्या यह हार्ट अटैक, स्ट्रोक या ब्रेन ट्यूमर का संकेत हो सकता है? जवाब- आमतौर पर ऐसा नहीं होता। एक्सप्लोडिंग हेड सिंड्रोम का हार्ट अटैक, स्ट्रोक या ब्रेन ट्यूमर से सीधा संबंध नहीं है। सवाल- किन लोगों को यह समस्या ज्यादा होती है? जवाब- यह समस्या किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकती है। लेकिन कुछ लोगों में इसका खतरा ज्यादा होता है। ग्राफिक में देखिए- डॉक्टर मानते हैं कि स्ट्रेस और थकान से ब्रेन सोते समय पूरी तरह रेस्ट मोड में नहीं जा पाता। इससे नींद का बैलेंस बिगड़ता है। कुछ मामलों में यह जेनेटिक भी हो सकता है। सवाल- इस कंडीशन में घबराने की बजाय क्या करना चाहिए? जवाब- सबसे पहले यह समझें कि यह खतरनाक कंडीशन नहीं है। इसलिए– अगर आवाज के बाद नींद टूट जाए तो खुद को याद दिलाएं कि यह ब्रेन का सिर्फ इंबैलेंस्ड रिएक्शन भर है, असली धमाका नहीं। धीरे-धीरे ब्रेन इस डर से बाहर आ जाता है।सवाल- कब डॉक्टर से कंसल्ट करना जरूरी है? जवाब- अगर यह समस्या बार-बार होने लगे तो डॉक्टर से मिलना जरूरी है। ग्राफिक में देखिए कब डॉक्टर से कंसल्ट करना चाहिए- कुछ कंडीशंस में डॉक्टर EEG, MRI या स्लीप टेस्ट करा सकते हैं। इससे यह पक्का किया जाता है कि कोई दूसरी बीमारी तो नहीं है। ज्यादातर मामलों में जांच सामान्य आती है, जिससे मरीज को मानसिक राहत मिलती है। सवाल- क्या इसमें दवाओं की जरूरत पड़ती है या ये अपने आप ठीक हो जाती है? जवाब- अधिकतर मामलों में यह समस्या बिना दवा के ठीक हो जाती है। इसके अलावा- सवाल- इस समस्या से बचने के लिए क्या सावधानियां बरतनी चाहिए? जवाब- इसके लिए पूरी नींद लेना सबसे जरूरी है। साथ ही कुछ और बाताें का ख्याल रखें। जैसेकि- ………………ये खबर भी पढ़िएफिजिकल हेल्थ- वरुण धवन की बेटी को DDH: डॉक्टर से जानें क्या है ये बीमारी, इसके लक्षण, डायग्नोसिस, सही इलाज और जरूरी सावधानियां बॉलीवुड एक्टर वरुण धवन ने कुछ दिन पहले एक इंटरव्यू में बताया था कि उनकी बेटी लारा को डेढ़ साल की उम्र में DDH डायग्नोज हुआ था। DDH यानी ‘डेवलपमेंटल डिस्प्लेसिया ऑफ हिप।’ यह कंडीशन हिप जॉइंट के पूरी तरह विकसित न हो पाने से बनती है। आगे पढ़िए…