फरियादिया अपने ही बयान से मुकर गई। उसने अदालत में स्वीकार किया कि रुपये के लेनदेन के विवाद के चलते उसने कालीचरण के खिलाफ झूठा मामला दर्ज कराया था। इस खुलासे के बाद विशेष न्यायाधीश ने आरोपित कालीचरण को दोषमुक्त कर दिया।