गर्मियों में कुछ लोगों को सिरदर्द, भारीपन जैसी समस्याएं होती हैं। कभी अचानक चक्कर आ जाता है। कई बार तो इसकी वजह से डेली रुटीन तक प्रभावित हो जाता है। तेज गर्मी में शरीर से ज्यादा पसीना निकलता है। पसीने के साथ जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स भी निकलते हैं। इससे सिरदर्द, थकान, चक्कर या कमजोरी जैसे लक्षण महसूस होते हैं। मेडिसिन की भाषा में इसे ‘हीट हेडेक’ कहते हैं। यह कोई अलग बीमारी नहीं है, बल्कि शरीर का एक संकेत है कि वह गर्मी से परेशान है। इसलिए आज ‘जरूरत की खबर’ में जानेंगे कि- एक्सपर्ट- डॉ. अली शेर, सीनियर कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन, अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल, दिल्ली सवाल- हीट हेडेक (सिरदर्द) क्या होता है? जवाब- हीट हेडेक गर्म टेम्परेचर की वजह से होने वाला सिरदर्द है। यह तेज गर्मी, धूप या शरीर के ज्यादा गर्म होने की वजह से होता है। इसे ‘हीट-इंड्यूस्ड हेडेक’ भी कहा जाता है। पॉइंटर्स से इसे समझिए- सवाल- हीट हेडेक क्यों होता है? जवाब- हीट हेडेक आमतौर पर तीन मुख्य कारणों से होता है- इसे ऐसे समझिए– सवाल- क्या हीट हेडेक नॉर्मल हेडेक या माइग्रेन से अलग होता है? जवाब- हीट हेडेक सामान्य सिरदर्द या माइग्रेन से अलग है, क्योंकि इसका मुख्य कारण गर्मी और शरीर में पानी की कमी है। सवाल- किन स्थितियों में हीट हेडेक होने का रिस्क बढ़ जाता हैं? जवाब- कुछ परिस्थितियों में हीट हेडेक का खतरा ज्यादा बढ़ जाता है। ग्राफिक से समझते हैं- सवाल- हीट हेडेक के लक्षण और संकेत क्या होते हैं? जवाब- हीट हेडेक के लक्षण शुरुआत में अमूमन हल्के होते हैं, लेकिन अगर समय पर ध्यान न दिया जाए तो ये बढ़ सकते हैं। सभी लक्षण ग्राफिक में देखिए- सवाल- गर्मियों में कौन-सी आदतें हीट हेडेक को ट्रिगर करती हैं? जवाब- गर्मियों में रोजमर्रा की कुछ आदतें हीट हेडेक बढ़ा सकती हैं। पॉइंटर्स से समझिए- 1. बॉडी सिग्नल इग्नोर करना 2. गलत टाइमिंग 3. इंस्टेंट एनर्जी पर निर्भरता 4. रेस्ट और रिकवरी की कमी सवाल- गर्मियों में किन लोगों को हीट हेडेक का रिस्क ज्यादा होता है? जवाब- कुछ लोगों में हीट हेडेक का जोखिम दूसरों की तुलना में ज्यादा होता है। इस ग्राफिक में देखिए- सवाल- हीट हेडेक से बचने के लिए क्या करना चाहिए? जवाब- कुछ आसान आदतें अपनाकर हीट हेडेक से काफी हद तक बचा जा सकता है। सभी हेल्दी आदतें ग्राफिक में देखिए- सवाल- अगर हीट हेडेक हो तो क्या गलतियां नहीं करनी चाहिए? जवाब- कुछ लोग सिरदर्द होने पर कुछ ऐसी गलतियां करते हैं, जिससे समस्या बढ़ सकती है। जैसेकि– सवाल- क्या सनस्ट्रोक और हीट हेडेक में कोई रिलेशन होता है? जवाब- हां, कई बार हीट हेडेक सनस्ट्रोक या हीट-इलनेस का शुरुआती संकेत हो सकता है। पॉइंटर्स से समझते हैं- सवाल- क्या बार-बार होने वाला हीट हेडेक किसी बड़ी बीमारी का संकेत हो सकता है? जवाब- हां, कभी-कभी ये गंभीर बीमारी का संकेत भी हो सकता है। कब चिंता की बात हो सकती है? सवाल- किस स्थिति में डॉक्टर को दिखाने की जरूरत होती है? जवाब- ये लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर को दिखाएं- कुल मिलाकर, हीट हेडेक के रूप में शरीर हमसे ये कह रहा होता है कि मुझे पानी, आराम और ठंडे माहौल की जरूरत है। गर्मियों में बस थोड़ी–सी सावधानी बरतकर और शरीर को हाइड्रेटेड रखकर इस समस्या से काफी हद तक बचा जा सकता है। …………………………. ये खबर भी पढ़ें… जरूरत की खबर- गर्मियों में ज्यादा आइसक्रीम न खाएं:इसमें हैं खतरनाक इंग्रीडिएंट, जानें 7 हेल्थ रिस्क, डॉक्टर से समझें इसका साइंस गर्मियों में लोग आइसक्रीम को ‘कूलिंग फूड’ मानकर खाते हैं। लेकिन ज्यादा आइसक्रीम खाने से कई हेल्थ रिस्क हो सकते हैं। ‘वर्ल्ड जर्नल ऑफ फार्मास्यूटिकल्स एंड लाइफ साइंस’ (WJPLS) में पब्लिश स्टडी के मुताबिक, आइसक्रीम में हाई शुगर और सैचुरेटेड फैट होता है। ये शरीर में इंफ्लेमेशन और मेटाबॉलिक डिसऑर्डर का रिस्क बढ़ाते हैं। इससे मोटापा, टाइप 2 डायबिटीज और हार्ट डिजीज का जोखिम भी बढ़ता है। पूरी खबर पढ़ें…