लोकसभा में चर्चा और मतदान के बाद यह महत्वपूर्ण विधेयक पारित नहीं हो सका। सदन में हुई वोटिंग के दौरान बिल के पक्ष में पर्याप्त समर्थन नहीं मिल पाया, जिसके चलते इसे असफलता का सामना करना पड़ा।