शुक्रवार, 17 अप्रैल को लोकसभा में विधानसभाओं में महिलाओं को 33% आरक्षण देने वाला 'संविधान संशोधन बिल' लोकसभा में गिर गया. मोदी सरकार सदन में इस बिल को पास कराने के लिए जरूरी 'दो-तिहाई बहुमत' का आंकड़ा नहीं जुटा पाई.यह इतना अहम क्यों है?यह संसद में नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा पेश किया गया पहला बिल है, जो पराजित हुआ है.सरकार को पहले भी कानून लाने में अड़चनें जरूर आई हैं—जैसे अपने पहले कार्यकाल में 'भूमि अधिग्रहण बिल' (Land Acquisition Bill) या दूसरे कार्यकाल में 'कृषि कानून'. लेकिन, उस समय सरकार ने इन बिलों को खुद ही वापस ले लिया था. यह पहली बार है जब सरकार कोई बिल लेकर आई, उस पर वोटिंग हुई और सरकार उसे पास कराने में नाकाम रही. बात कहां बिगड़ी?महिला आरक्षण बिल 2023 में पास हुआ था और तब विपक्ष ने सरकार का पूरा साथ दिया था. लेकिन इस बार बाजी पलट गई. विपक्षी दलों ने बिल का कड़ा विरोध किया, क्योंकि उन्हें इसमें परिसीमन को जबरदस्ती जोड़ने की कोशिश नजर आई.अब आगे क्या?बिल का गिरना दोनों ही पक्षों के लिए फायदे और नुकसान की वजह बन सकता है.SIR का कहां ज्यादा असर: ममता की सीट पर 25% तो सुवेंदु की सीट पर 3% वोटर हुए कम