रिलेशनशिप एडवाइज- पार्टनर इंटीमेट होना चाहता है:मैं अभी तैयार नहीं हूं, मैं मना करती हूं, वो जिद करता है, उसे कैसे समझाऊं?

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सवाल- मेरी उम्र 24 साल है। मैं मास्टर्स की पढ़ाई कर रही हूं। एक साल से रिलेशनशिप में हूं। हमारे बीच बहुत अच्छी बॉन्डिंग है। प्रॉब्लम ये है कि मेरा बॉयफ्रेंड इंटीमेट होना चाहता है, लेकिन अभी मैं इसके लिए तैयार नहीं हूं। वो अलग-अलग तरीकों से कहता है, इंसिस्ट करता है और मुझे कन्विंस करने की कोशिश करता है। मैं ‘हां’ बोलने के लिए तैयार नहीं हूं और खुलकर ‘ना’ भी नहीं बोल पा रही हूं। मैं उसे कैसे समझाऊं? इस सिचुएशन से कैसे डील करूं? प्लीज गाइड मी। एक्सपर्ट- डॉ. जया सुकुल, क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट, नोएडा जवाब- सबसे पहले तो शुक्रिया, आपने जरूरी सवाल पूछा है। इससे बहुत लोगों को डिसीजन मेकिंग में मदद मिलेगी। रिलेशनशिप में अच्छी बॉन्डिंग पॉजिटिव इंटेंट है, लेकिन फिजिकल इंटीमेसी पूरी तरह आपकी सहजता और मानसिक तैयारी पर निर्भर है। इंटीमेसी कोई 'रिलेशनशिप टेस्ट' नहीं है, जिसे पास करना जरूरी ही है। एक हेल्दी रिश्ते में 'ना' का सम्मान, 'हां' से भी ज्यादा जरूरी है। अगर आप तैयार नहीं हैं तो दबाव में लिया गया कोई भी फैसला आपकी मेंटल हेल्थ और रिश्ते, दोनों को नुकसान पहुंचा सकता है। आइए आपकी सिचुएशन को समझते हैं और सॉल्यूशन पर बात करते हैं। सबसे पहले ‘NO’ का मतलब समझिए- ‘NO’ का मतलब सिर्फ ‘NO’ है बॉलीवुड की एक फिल्म है, ‘पिंक।’ फिल्म के आखिरी सीन में अमिताभ बच्चन बतौर लॉयर कोर्ट में दलील देते हुए कहते हैं, “NO का मतलब सिर्फ NO होता है।” दुनिया के हर शख्स, खासतौर पर पुरुषों को यह बात समझने की बहुत जरूरत है। सहमति- इंटीमेसी की पहली और सबसे जरूरी शर्त किसी भी रिश्ते में कंसेंट यानी सहमति को सही तरीके से समझना बहुत जरूरी है। यह सिर्फ एक बार 'हां' कहने तक सीमित नहीं होता। इसमें अपनी मर्जी, सहजता और कभी भी फैसला बदलने का हक शामिल है। आइए ग्राफिक के जरिए समझते हैं कि कंसेंट का असली मतलब क्या है। ‘NO’ कहने पर मैनिपुलेट कर सकता है पार्टनर ऐसी कंडीशन में पार्टनर अक्सर 'इमोशनल मैनिपुलेशन' का सहारा लेते हैं। आपने लिखा भी है कि पार्टनर तरह-तरह से इंसिस्ट करता है। यह प्यार नहीं, बल्कि कंट्रोलिंग का एक तरीका है। अगर किसी शर्त या दवाब के बाद पार्टनर ‘हां’ कहे तो उसका मतलब ‘ना’ ही होता है। इसे दोनों को समझना होगा। ‘बात मानने’ और ‘कंसेंट’ में बड़ा फर्क रिश्ते में किसी की बात मान लेना और मन से राजी होना, दोनों में बड़ा फर्क है। फीमेल पार्टनर झगड़ा टालने या सामने वाले की खुशी के लिए 'हां' कह देती हैं, लेकिन असल में तैयार नहीं होतीं। ऐसी मजबूरी में दी गई सहमति धीरे-धीरे रिश्ते में कड़वाहट घोल सकती है। ग्राफिक से समझिए कि किस ‘हां’ का मतलब कंसेंट नहीं है- सिर्फ पार्टनर की खुशी के लिए ‘हां’ न करें अगर आप अपने मन और मूल्यों के खिलाफ जाकर पार्टनर की खुशी के लिए समझौता करती हैं तो यह 'सेल्फ-बिट्रेयल' (स्वयं को धोखा देना) है। इसका आपके व्यक्तित्व पर गहरा असर पड़ता है। इससे कई तरह के नुकसान हो सकते हैं। ग्राफिक में देखिए- पार्टनर वो जो ‘NO’ का सम्मान करे अगर पार्टनर आपकी 'ना' सुनने के बाद भी बार-बार वही बात दोहराता है या नाराज होता है तो संभल जाएं। यह संकेत है कि वह आपकी भावनाओं से ज्यादा अपनी जरूरतों को अहमियत दे रहा है। अच्छा पार्टनर ‘NO’ का सम्मान करता है। अपने साथ समझौता न करें रिलेशनशिप में अपनी सीमाएं तय करना स्वार्थ नहीं, बल्कि सेल्फ-रिस्पेक्ट है। जो पार्टनर आपकी 'ना' का सम्मान नहीं कर सकता, उससे भविष्य में हेल्दी रिलेशनशिप की उम्मीद करना मुश्किल है। इस स्थिति से कैसे निपटें? अगर आप ऐसी दुविधा में हैं तो इन 4 स्टेप्स की मदद से स्थिति को संभाल सकती हैं- 1. आमने-सामने बैठकर बात करें- इशारों में बात करने की बजाय पार्टनर के साथ बैठकर बात करें। उसे स्पष्ट शब्दों में कहें- मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूं और हमारे रिश्ते की कद्र करती हूं, लेकिन अभी मैं इंटीमेसी के लिए मेंटली तैयार नहीं हूं। अगर आपके बीच वाकई अच्छी बॉन्डिंग है तो वह आपकी ईमानदारी का सम्मान करेगा, न कि आप पर दबाव बनाएगा। 2. अपनी प्राथमिकता तय करें अमूमन लोग सोचते हैं कि 'ना' कहने से रिश्ता टूट जाएगा, लेकिन याद रखें कि खुद की मर्जी के खिलाफ जाकर कुछ करना प्यार नहीं, समझौता है। आपका मानसिक सुकून और आत्म-सम्मान सबसे ऊपर होना चाहिए। जो रिश्ता आपकी सहजता की कीमत मांगे, वह लंबे समय तक खुशी नहीं दे सकता। 3. पार्टनर की प्रतिक्रिया को नोटिस करें 'ना' कहने के बाद यह जरूर देखें कि आपके पार्टनर का व्यवहार कैसा है। क्या वह आपकी बात मानकर आपको समय दे रहा है? या फिर नाराज हो रहा है, इमोशनल ब्लैकमेल कर रहा है या नजरअंदाज कर रहा है? उसकी यह प्रतिक्रिया आपको बताएगी कि वो आपसे प्यार करता है या सिर्फ अपनी जरूरतें पूरी करना चाहता है। 4. गिल्ट से पूरी तरह बाहर निकलें कई बार लड़कियां 'ना' कहने के बाद खुद को दोषी महसूस करने लगती हैं। उन्हें लगता है कि उन्होंने पार्टनर का दिल दुखाया है। यह समझना जरूरी है कि अपनी बॉडी और लाइफ पर आपका पूरा अधिकार है। 'ना' कहना आपका बुनियादी हक है। खुद को यह बताएं कि आपने कोई गलती नहीं की है। ………………ये खबर भी पढ़िएरिलेशनशिप एडवाइज- कहीं मुझे प्यार तो नहीं हो गया: हमेशा बस उसका ही ख्याल, न देखूं तो बेचैनी, ये प्यार है या सिर्फ अट्रैक्शन आप जीवन के उस पड़ाव पर हैं, जहां भावनाएं बहुत तीव्र होती हैं। इस उम्र में किसी की तरफ अट्रैक्ट होना, हर वक्त उसके बारे में सोचना, बेचैनी होना बहुत स्वाभाविक है। आगे पढ़िए…