योग गुरु बाबा रामदेव ने हाल ही में राष्ट्र सेवा के प्रति समर्पित एक विशाल 'सेवा इकोसिस्टम' (सेवा तंत्र) का विवरण साझा किया है. उन्होंने बताया कि किस प्रकार स्वास्थ्य, अनुसंधान, शिक्षा और स्वयंसेवक-आधारित पहलों के माध्यम से देश को आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया जा रहा है. रामदेव बाबा के अनुसार, यह केवल एक संगठन नहीं, बल्कि 'निःस्वार्थ सेवा' का एक मिशन है.स्वयंसेवकों की विशाल फौजइस सेवा अभियान की सबसे बड़ी शक्ति इसके स्वयंसेवक हैं. बाबा रामदेव ने बताया कि वर्तमान में लगभग 5 लाख कर्मयोगी और 1 करोड़ से अधिक योग स्वयंसेवक देशभर में सामुदायिक सेवा में जुटे हुए हैं. यह विशाल नेटवर्क करीब 1 करोड़ 'टचपॉइंट्स' के माध्यम से लोगों को योग, कल्याण (wellness) और स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रमों से जमीनी स्तर पर जोड़ रहा है.आधुनिक विज्ञान और परंपरा का तालमेलरामदेव ने कहा कि पतंजलि के इस मिशन में केवल पारंपरिक ज्ञान ही नहीं, बल्कि आधुनिक विज्ञान का भी समावेश है. बाबा रामदेव के अनुसार, इस अभियान से 5,000 से अधिक डॉक्टर और लगभग 500 वरिष्ठ वैज्ञानिक जुड़े हुए हैं. ये विशेषज्ञ आयुर्वेद और आधुनिक चिकित्सा के बीच एक सेतु का काम कर रहे हैं, ताकि लोगों को प्रभावी और किफायती स्वास्थ्य समाधान मिल सकें.इंफ्रास्ट्रक्चर और आर्थिक निवेशबाबा रामदेव ने दावा किया है कि राष्ट्र निर्माण के इस कार्य में बुनियादी ढांचे का भी विस्तार किया गया है. पूरे भारत में 5,000 से अधिक केंद्र संचालित हैं, जो योग और आयुर्वेद को आम जनता तक पहुँचा रहे हैं. इस पूरे तंत्र को चलाने के लिए प्रतिवर्ष लगभग ₹5,000 करोड़ का खर्च आता है. बाबा रामदेव ने जोर देकर कहा कि यह निवेश किसी मुनाफे के लिए नहीं, बल्कि दीर्घकालिक राष्ट्र-निर्माण और सार्वजनिक स्वास्थ्य को मजबूत करने के लिए किया जा रहा है.पतंजलि: सेवा की रीढ़इस पूरे अभियान के पीछे 'पतंजलि' एक संगठित रीढ़ की तरह खड़ा है. यहां अस्पतालों, अनुसंधान केंद्रों और शैक्षणिक संस्थानों के माध्यम से भारतीय परंपराओं को आधुनिक जीवनशैली के साथ जोड़ा जा रहा है.