Eating Less For Energy: क्या कम खाना खाने से बॉडी में रहती है ज्यादा एनर्जी, यह टेक्निक खतरनाक या कामयाब?

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Intermittent Fasting Health Effects: आजकल यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि क्या कम खाना खाने से शरीर में ज्यादा एनर्जी रहती है, या फिर यह तरीका कहीं सेहत के लिए खतरनाक तो नहीं. इसपर कई रिसर्च किए गए, जिसने इस पूरे मुद्दे को एक नया मोड़ दिया है. साइंटिस्ट इसको लेकर कुछ ऐसा बता रहे हैं, जिसको सुनकर आपको लगेगा कि यह तो हमें पहले करना चाहिए था. चलिए आपको बताते हैं कि क्या सच में क्या कम खाना खाने से बॉडी में रहती है ज्यादा एनर्जी और यह भी समझाते हैं कि यह टेक्निक खतरनाक या कामयाब.क्या मिला स्टडी मेंAnnals of Internal Medicine की रिपोर्ट के अनुसार, एक बड़े स्टडी में पाया गया कि जो लोग हफ्ते में तीन दिन उपवास या इंटरमिटेंट फास्टिंग करते थे, उनका वजन सामान्य रोजाना कम कैलोरी डाइट अपनाने वालों की तुलना में 50 प्रतिशत से ज्यादा घटा. एक साल में इंटरमिटेंट फास्टिंग करने वालों ने औसतन 7.6 प्रतिशत बॉडी वेट कम किया, जबकि रोज कैलोरी घटाने वालों में यह आंकड़ा करीब 5 प्रतिशत रहा. इससे यह संकेत मिलता है कि सही तरीके से कम खाना न सिर्फ वजन घटाने में मदद कर सकता है, बल्कि शरीर की ऊर्जा को बेहतर तरीके से मैनेज करने में भी हेल्पफुल हो सकता है.रिसर्चर का क्या कहना हैरिसर्चर के मुताबिक, मोटापे की समस्या पिछले 30 सालों में इतनी बढ़ गई है कि दुनिया भर में एक अरब से ज्यादा लोग इससे प्रभावित हैं. ऐसे में यह समझना जरूरी हो गया है कि कौन-सा तरीका लंबे समय तक अपनाया जा सकता है. स्टडी की को-ऑथर और यूनिवर्सिटी ऑफ कोलोराडो की प्रोफेसर विक्टोरिया कैटेनाची का कहना है कि हफ्ते में तीन दिन उपवास करना वजन घटाने के लिए एक तरह का स्वीट स्पॉट हो सकता है. उनके मुताबिक, अगर उपवास के दिन ज्यादा हों तो लोग इसे पूरा नहीं कर पाते और अगर कम हों तो कैलोरी की कमी उतनी असरदार नहीं बन पाती.किन लोगों पर हुआ रिसर्चइस रिसर्च में 165 ओवरवेट और मोटापे से जूझ रहे लोगों को दो ग्रुप में बांटा गया. एक ग्रुप ने 4:3 पैटर्न अपनाया, यानी हफ्ते के तीन दिन उन्होंने अपनी सामान्य कैलोरी का करीब 80 प्रतिशत कम खाया, जबकि बाकी चार दिन कैलोरी की सख्त गिनती नहीं थी, सिर्फ हेल्दी खाने की सलाह दी गई. दूसरे ग्रुप को रोज़ाना करीब 34 प्रतिशत कैलोरी कम करने का लक्ष्य दिया गया. कागज पर दोनों का साप्ताहिक कैलोरी डेफिसिट लगभग बराबर था.दिलचस्प बात यह रही कि इंटरमिटेंट फास्टिंग करने वाले लोगों ने एक साल में औसतन 7.7 किलो वजन घटाया, जबकि रोज कैलोरी कम करने वालों में यह कमी 4.8 किलो रही. इतना ही नहीं, फास्टिंग ग्रुप में बीच में छोड़ने वालों की संख्या भी कम रही. इसका एक बड़ा कारण यह माना गया कि इस तरीके में लोगों को हर दिन कैलोरी गिनने की झंझट नहीं होती और हमेशा भूखे रहने का एहसास भी कम होता है.एक्सपर्ट का क्या कहना हैएक्सपर्ट्स का मानना है कि जब लोग कुछ दिन कम खाते हैं, तो कई बार बाकी दिनों में भी वे अपने आप थोड़ा संतुलित खाने लगते हैं. इससे शरीर को स्थिर एनर्जी मिलती है और मेटाबॉलिज्म पर भी पॉजिटिव असर पड़ सकता है. यूनिवर्सिटी ऑफ सरे के न्यूट्रिशन एक्सपर्ट एडम कॉलिन्स के अनुसार, असली दुनिया में इंटरमिटेंट एनर्जी रेस्ट्रिक्शन अक्सर बेहतर रिजल्ट और ज्यादा कंप्लायंस देता है. हालांकि, एक्सपर्ट यह भी साफ करते हैं कि कम खाना तभी फायदेमंद है जब यह संतुलित और समझदारी से किया जाए. बहुत ज्यादा सख्ती, बिना मेडिकल सलाह के लंबे समय तक भूखा रहना, शरीर की एनर्जी को नुकसान भी पहुंचा सकता है. यह भी पढ़ें: पूर्वजों के पास थी बेहतर फूड सेफ्टी सिस्टम, अग्नि और भोजन का वो सच जो नहीं जानते होंगे आपDisclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.