खांसी एक ऐसी समस्या है जिससे लगभग हर इंसान अपने जीवन में कभी न कभी जरूर परेशान होता है. कभी हल्की-सी गले में गुदगुदी से खांसी आ जाती है, तो कभी लगातार खांसते-खांसते सीने में दर्द होने लगता है. अक्सर लोग खांसी को एक छोटी-सी बीमारी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन कई बार यही खांसी शरीर के अंदर चल रही किसी समस्या का संकेत भी हो सकती है. खासतौर पर जब खांसी के साथ बलगम (कफ) आने लगे, तो मन में यह सवाल जरूर उठता है कि क्या फेफड़ों में जमा बलगम खतरनाक है और खांसी आखिर क्यों आती है. तो आइए जानते हैं कि हमें खांसी क्यों आती है और क्या फेफड़ों में जमा बलगम हमारे लिए खतरनाक होता है. खांसी क्या है और क्यों आती है?खांसी हमारे शरीर की एक नेचुरल सुरक्षा प्रक्रिया है. जब हमारे गले या फेफड़ों में कोई बाहरी चीज जैसे धूल, धुआं, कीटाणु, एलर्जी के कण या ज्यादा बलगम जमा हो जाता है, तो शरीर खांसी के जरिए उसे बाहर निकालने की कोशिश करता है. खांसी शरीर का सफाई करने का तरीका है. खांसी आने के मुख्य कारण, गले या श्वसन नलिकाओं में जलन, सर्दी-जुकाम या फ्लू, धूल, धुआं या प्रदूषण, एलर्जी, फेफड़ों में ज्यादा बलगम बनना, पेट के एसिड का ऊपर आना (एसिड रिफ्लक्स / GERD) और दमा या अस्थमा हैं. बलगम (कफ) क्या होता है?खांसी के दो प्रकार हैं. जिसमें पहला सूखी खांसी, इसमें बलगम नहीं निकलता, गले में खुजली या जलन महसूस होती है. आमतौर पर एलर्जी, वायरल इंफेक्शन या एसिड रिफ्लक्स के कारण होती है. वहीं दूसरी कफ वाली खांसी, इसमें गाढ़ा बलगम निकलता है. सर्दी-जुकाम, ब्रोंकाइटिस, निमोनिया जैसी बीमारियों में आम है. शरीर फेफड़ों की गंदगी बाहर निकालने की कोशिश करता है. बलगम एक गाढ़ा, चिपचिपा पदार्थ होता है जो फेफड़े और गला बनाते हैं. इसका काम श्वसन नलिकाओं को नम रखना, धूल, कीटाणु और एलर्जी को फंसा कर बाहर निकालना है. थोड़ा-सा बलगम बनना सामान्य और जरूरी है. क्या फेफड़ों में जमा बलगम खतरनाक होता है?सामान्य तौर पर फेफड़ों में हल्का और साफ बलगम होना खतरनाक नहीं होता, क्योंकि यह शरीर की नेचुरल सुरक्षा प्रणाली का हिस्सा है और फेफड़ों को साफ रखने में मदद करता है. लेकिन कुछ स्थितियों में जमा बलगम चिंता का कारण बन सकता है. अगर बलगम का रंग पीला या हरा हो जाए, तो यह सर्दी, फ्लू या ब्रोंकाइटिस जैसे संक्रमण का संकेत हो सकता है, जबकि बलगम में खून आना एक गंभीर स्थिति होती है और तुरंत डॉक्टर को दिखाना जरूरी होता है. इसके अलावा, खांसी तीन हफ्तों से ज्यादा समय तक बनी रहे, तो यह अस्थमा, सीओपीडी, टीबी या दिल से जुड़ी बीमारी का लक्षण हो सकती है. अगर बलगम के साथ सांस लेने में परेशानी, सीने में दर्द, तेज बुखार या घरघराहट की आवाज जैसे लक्षण भी हों, तो इसे बिल्कुल नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. यह भी पढ़ें : आंखों में दिखे यह लक्षण तो समझ जाएं होने वाला है डिमेंशिया, तुरंत भागें डॉक्टर के पासDisclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.